Renowned Urdu Poet Dr. Bashir Badr Passes Away at 91 in Bhopal
डॉ.नवीन आनंद जोशी@भोपाल। ईद के मुबारक दिन जब लोग गले मिलकर खुशियां बांट रहे थे, उसी दिन उर्दू शायरी की दुनिया का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए अस्त हो गया। मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र ने गुरुवार, 28 मई 2026 को भोपाल स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे 91 वर्ष के थे और लंबे समय से डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।
उनके निधन की खबर मिलते ही देशभर के साहित्यकारों, शायरों, पत्रकारों, राजनीतिक हस्तियों और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर लोग उनके मशहूर शेर साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
डॉ. बशीर बद्र केवल एक शायर नहीं थे, बल्कि वे उर्दू ग़ज़ल की उस परंपरा के प्रतिनिधि थे जिसने आम आदमी की भावनाओं को बेहद सरल लेकिन गहरी भाषा में अभिव्यक्त किया। उनकी शायरी में मोहब्बत थी, दर्द था, तन्हाई थी, रिश्तों की गर्माहट थी और समाज की सच्चाइयों का आईना भी था।
उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर उसी ताजगी के साथ मौजूद हैं—
‘कोई हाथ भी न मिलाएगा,
जो गले मिलोगे तपाक से।’
और
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।”
डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में उर्दू साहित्य की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। मेरठ के दंगों के बाद वे गहरे सदमे में आ गए थे और फिर भोपाल आकर बस गए। भोपाल की साहित्यिक और सांस्कृतिक फिजाओं ने उन्हें नई ऊर्जा दी और यहीं से उनकी शायरी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं।
उनकी ग़ज़लों ने न केवल मुशायरों में लोगों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि फिल्मों, मंचों और साहित्यिक आयोजनों में भी उन्हें अपार लोकप्रियता मिली। उनकी लेखनी की सबसे बड़ी ताकत उसकी सादगी रही। वे कठिन भावों को बेहद सहज शब्दों में कहने की अद्भुत क्षमता रखते थे।
भारत सरकार ने उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया था। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
भोपाल, जो वर्षों तक उनकी कर्मभूमि रहा, आज अपने सबसे प्रिय शायर को नम आंखों से विदाई दे रहा है। ईद के दिन उनका दुनिया से जाना साहित्य जगत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। वे भले ही इस दुनिया से विदा हो गए हों, लेकिन उनकी शायरी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।
