Menstrual Hygiene Awareness Essential for Women’s Health: Dr. Sujata Sanjay
विश्व मासिक धर्म दिवस पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता संजय ने स्वस्छता को लेकर सुझाए जरूरी टिप्स
देहरादून@ Rashtriy Vichar#Helth#। विश्व मासिक धर्म दिवस के अवसर पर संजय ऑर्थोपेडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता संजय ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर समाज में खुलकर संवाद होना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक के आधुनिक दौर में भी मासिक धर्म को लेकर समाज में झिझक, मिथक और गलत धारणाएं बनी हुई हैं। कई किशोरियां और बालिकाएं आज भी पीरियड्स पर खुलकर बात करने से डरती हैं, जिसके कारण वे सही जानकारी और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं।

डॉ. सुजाता संजय ने कहा कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखना महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। एक स्वस्थ महिला ही स्वस्थ समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि किशोरियों और बालिकाओं को इस विषय पर जागरूक करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मासिक धर्म केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और गरिमा से जुड़ा विषय भी है। यदि सही जानकारी, जागरूकता और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए तो महिलाएं स्वस्थ और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जी सकती हैं।
मासिक धर्म क्या है?
मासिक धर्म महिलाओं के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हर महीने गर्भाशय की अंदरूनी परत बनती है ताकि गर्भधारण होने पर भ्रूण को पोषण मिल सके। जब गर्भधारण नहीं होता, तब यह परत रक्त के रूप में शरीर से बाहर निकलती है। यही प्रक्रिया मासिक धर्म कहलाती है। सामान्यतः यह चक्र 21 से 35 दिनों के बीच होता है और 3 से 7 दिनों तक चल सकता है। पीरियड्स किसी बीमारी का संकेत नहीं हैं, बल्कि यह महिलाओं के स्वस्थ प्रजनन तंत्र का एक सामान्य हिस्सा है। फिर भी समाज में इसे लेकर शर्म और संकोच का माहौल बना हुआ है, जो बदलना बेहद जरूरी है।
मासिक धर्म पर स्वच्छता क्यों जरूरी है?:
इस दौरान शरीर अधिक संवेदनशील हो जाता है। यदि इस समय स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए, तो संक्रमण, खुजली, त्वचा संबंधी समस्याएँ और प्रजनन तंत्र से जुड़ी कई बीमारियाँ हो सकती हैं। खराब हाइजीना महिलाओं के शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।
कई ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में आज भी लड़कियाँ पुराने कपड़े, राख या अन्य असुरक्षित चीजों का उपयोग करती हैं। यह गंभीर संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलि मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है।
पीरियड्स के दौरान अपनाई जाने वाली जरूरी सावधानियाँ:
पीरियड्स के दौरान सेनेट्री नेपकिन या साफ कपड़ा टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप जैसे सुरक्षित उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। हर महिला अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार सही विकल्प चुन सकती है।
सेनेटरी पैड को दिन में दो बार बदलना चाहिए। लंबे समय तक एक ही पैड उपयोग करने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पैड बदलने से पहले और बाद में हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। यह संक्रमण से बचाव के लिए बेहद जरूरी है।
किशोरियों में जागरूकता की आवश्यकता:
कई लड़कियों को पहला पीरियड आने से पहले इसकी सही जानकारी नहीं होती। अचानक ब्लीडिंग शुरू होने पर वे डर जाती हैं और मानसिक तनाव महसूस करती हैं। इसलिए माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे किशोरियों को समय रहते सही जानकारी दें। स्कूलों में पीरियड्स के दौरान हाइजीन को बढ़ावा देना चाहिए ताकि लड़कियाँ बिना शर्म के इस विषय पर बात कर सकें। सही जानकारी मिलने से वे अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बनेंगी।
मासिक धर्म से जुड़े मिथक और सच्चाई :
हमारे समाज में आज भी पीरियड्स को लेकर कई मिथक प्रचलित हैं। कुछ जगहों पर महिलाओं को मंदिर जाने, रसोई में प्रवेश करने या सामान्य गतिविधियों में भाग लेने से रोका जाता है। उन्होंने कहा, ये धारणाएँ वैज्ञानिक आधार पर सही नहीं हैं।
