Darchula Traders Protest Nepal’s Ban on Indian Goods, Warn of Border Agitation
- झूला पुल पर धरना, बाजार बंद और ताला लगाने की चेतावनी
- व्यापार संघ ने प्रशासन को दिया अल्टीमेटम
नदीम परवेज@ धारचूला। नेपाल में भारतीय सामानों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। रविवार को धारचूला व्यापार संघ की पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा करते हुए आंदोलन की रणनीति तैयार की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उपजिलाधिकारी धारचूला के माध्यम से प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर भारत-नेपाल सीमा पर उत्पन्न व्यापारिक संकट का शीघ्र समाधान कराने की मांग की जाएगी।
नेपाल पुलिस नहीं दे रही प्रवेश: व्यापार संघ का कहना है कि नेपाल की प्रहरी (पुलिस) भारतीय व्यापारियों के सामान को सीमा पार नेपाल में प्रवेश नहीं करने दे रही है। इससे सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों को प्रतिदिन लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इस समस्या का समाधान नहीं कराया, तो सोमवार से अंतरराष्ट्रीय झूला पुल पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
नेपाल से मजदूरों के आवागमन पर रोक की मांग: बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि विरोधस्वरूप नेपाल से भारत आने वाले मजदूरों (लेबर) के आवागमन को रोका जाएगा। इसके अलावा नेपाल से भारत आने वाली विभिन्न सामग्रियों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग प्रशासन के समक्ष रखी जाएगी। व्यापारियों का कहना है कि जब तक भारतीय सामानों पर लगी रोक नहीं हटती, तब तक एकतरफा व्यापार स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी: व्यापार संघ ने स्पष्ट किया कि यदि उपजिलाधिकारी धारचूला और नेपाल के मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) स्तर पर वार्ता के बावजूद कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय झूला पुल पर धरना-प्रदर्शन, आमरण अनशन, बाजार बंद और आवश्यकता पड़ने पर पुल पर ताला लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

धारचूला के व्यापार पड़ रहा असर: व्यापारियों ने बताया कि धारचूला का लगभग आधा व्यापार नेपाल पर निर्भर है। सीमा पर प्रतिबंध लागू होने के बाद नेपाल रोड क्षेत्र की अधिकांश दुकानें समय से पहले बंद होने लगी हैं। ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है, जिससे व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
भारत में लगे नेपान के उत्पाद पर रोक: बैठक में नेपाल से आने वाले अखरोट तथा पूर्व में विवादों में रही नेपाली ककड़ी (खीरा) की भारत में बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई गई। व्यापारियों का कहना था कि यदि भारतीय उत्पादों पर रोक जारी रहती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन बनाए रखने के लिए समान नीति अपनाई जानी चाहिए।
दोनों देशों के प्रशासनिक पहल पर टिकी निगाहें: अब सीमांत क्षेत्र की निगाहें प्रशासनिक पहल और भारत-नेपाल अधिकारियों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह व्यापारिक विवाद व्यापक आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसका असर दोनों देशों के सीमा पार व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
बैठक में व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह थापा, महासचिव महेश गर्ब्याल, कमल कौशल, प्रकाश गुंज्याल, मुहम्मद अकरम, खड़क सिंह दानू, शकुंतला अगारी, अरुण गरबियाल ,मनीष सूद ओम प्रकाश वर्मा, नईम परवेज़, जावेद अहमद, खुशाल धामी, हरीश आगरी सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे।
