Nanda Devi Puja fair in Munsiyari’s Goripar region celebrates faith and tribal heritage with traditional attire, Dhol-Damau, Jhora-Chachari songs and folk dances.
- दशमी पर गूंजे ढोल-दमाऊ
- मां नंदा की भक्ति में रंगा गोरीपार
नदीम परवेज@ मुनस्यारी। सीमांत मुनस्यारी के दूरस्थ गोरीपार क्षेत्र स्थित ज्येष्ठरा बरपटिया बोथी गांव में मां नंदा देवी पूजन मेले के दौरान जनजातीय परंपरागत संस्कृति और आस्था का उल्लास देखने को मिला। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में जहां अष्टमी तिथि को नंदा देवी पूजन मेले का आयोजन होता है, वहीं बोथी गांव में दशमी तिथि को मेले के आयोजन की सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है।
मेले में ग्रामीण पारंपरिक घाघरा-कमला वेशभूषा में सजकर मां नंदा देवी मंदिर पहुंचे। ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक झोड़ा-चाचरी गायन और नृत्य में हिस्सा लेकर लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। गोरीपार क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीण भी इस उत्सव में शामिल हुए।
स्थानीय ग्रामीण मनोज सिंह बोथ्याल ने बताया कि दशमी तिथि को मां नंदा पूजन मेले के आयोजन की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। यह आयोजन सीमांत क्षेत्र की धार्मिक आस्था के साथ उसकी समृद्ध जनजातीय लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को भी जीवंत बनाए हुए है। मेले में ढोल-दमाऊ की थाप, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया।
