- स्वरोजगार को बताया पलायन रोकने का सबसे सशक्त माध्यम
- पर्यटन, होमस्टे, एडवेंचर और पहाड़ी उत्पादों में रोजगार की अपार संभावनाओं पर दिया जोर
- 2027 के चुनाव से पहले जुटी भीड़ के राजनीतिक मायने भी चर्चा में
वाचस्पति रयाल @ नरेंद्रनगर। उत्तराखंड की सियासत में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई ने चंबा में विशाल युवा संवाद कार्यक्रम के जरिए अपनी राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क की ताकत का अहसास कराया। चंबा स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में युवक-युवतियों और क्षेत्रीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी। युवाओं का उत्साह और कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ क्षेत्र की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे गई। कार्यक्रम को जहां युवाओं के भविष्य और रोजगार से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, वहीं इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दिनेश धनाई के जनाधार और राजनीतिक सक्रियता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

युवा संवाद को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री दिनेश धनाई ने कहा कि देश और प्रदेश युवाओं की ऊर्जा से चलते हैं, लेकिन जब यही ऊर्जा रोजगार की तलाश में अपने घर, गांव और अपनी माटी को छोड़कर शहरों की ओर पलायन करती है तो यह बेहद पीड़ादायक स्थिति होती है। उन्होंने कहा कि पलायन केवल लोगों का गांव छोड़ना नहीं है, बल्कि इसके साथ गांव की जीवंतता, संस्कृति, सभ्यता और प्रतिभा का भी पलायन होता है।
धनाई ने कहा कि इस समस्या का सबसे सशक्त समाधान स्वरोजगार है। आज का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर दूसरों को रोजगार देने वाला बन सकता है। इसके लिए युवाओं को अपनी सोच बदलने के साथ स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं का बेहतर उपयोग करना होगा।
उत्तराखंड की माटी में रोजगार की अपार संभावनाएं
पूर्व मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत से समृद्ध ऊर्जा प्रदेश है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय उत्पादों में रोजगार के अनेक अवसर मौजूद हैं। कृषि, हस्तशिल्प, पर्यटन, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप के क्षेत्र में युवा अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। आज तकनीक के माध्यम से गांव में बैठकर भी पूरी दुनिया से कारोबार किया जा सकता है। जरूरत केवल सही दिशा, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प की है।
उन्होंने युवाओं को स्वरोजगार के लिए पर्यटन आधारित गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान करते हुए होमस्टे, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रैकिंग गाइड, स्कीइंग, योग एवं वेलनेस सेंटर, मेडिटेशन सेंटर, कैब सर्विस, बाइक रेंटल, पहाड़ी उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशने की सलाह दी।
तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण से रुकेगा पलायन
धनाई ने कहा कि युवाओं को पलायन के लिए मजबूर होने से बचाने के लिए सरकार को तकनीकी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगारपरक प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी होगी। युवाओं को इस तरह तैयार करना होगा कि वे स्वयं रोजगार के अवसर तलाश सकें और दूसरों के लिए भी रोजगार का माध्यम बनें।
उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार, मेहनत, प्रतिभा और संकल्प में किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदलने की क्षमता है। यदि युवा स्वरोजगार को अपना लक्ष्य बना लें तो उत्तराखंड से पलायन की बढ़ती प्रवृत्ति को काफी हद तक रोका जा सकता है।
भीड़ और युवाओं का उत्साह, सियासी संदेश के मायने
कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ को आयोजकों की ओर से अब तक के कार्यक्रमों में रिकॉर्ड भागीदारी बताया गया। युवाओं की सक्रिय मौजूदगी और उत्साह ने इस आयोजन को राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बना दिया। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दिनेश धनाई की इस पहल को क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और युवा वर्ग के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
धनाई ने कहा कि युवा संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जिले के भविष्य, युवाओं की आकांक्षाओं और विकास की नई दिशा पर चिंतन करने का मंच है। युवाओं की भागीदारी से ही क्षेत्र में विकास और रोजगार के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं में उत्साह भरते हुए कहा कि चुनौतियों से डरने के बजाय उन्हें स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने प्रेरक पंक्तियों के साथ अपना संबोधन समाप्त किया—
लहरों से डरकर नैया कभी पार नहीं होती,
मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।
कार्यक्रम में छात्रसंघ अध्यक्ष राजन भंडारी, नितिन कुमार, गौरव गुसाईं, प्रवीण भंडारी, अमन सजवाण, अंकुश कोहली, जीशान, आकाश भंडारी, रॉबिन राणा, अंकित बहुगुणा, धनवीर, भूपेंद्र सिंह, भानु प्रताप, विकास पंवार, नवनीत रावत, अमित रतूड़ी, परमजीत और विजय नेगी सहित सैकड़ों युवा एवं क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।
