Wildlife expert Raza Kazmi reveals evidence of rhinos in Uttarakhand’s Terai region nearly 200 years ago, highlighting the state’s forgotten wildlife history.
- कार्बेट में आयोजित वन्य प्राणी सप्ताह में पत्रकारों से रूबरू हुए लेखक कासमी
- उत्तराखंड में गैंडों की मौजूदगी के मिलते हैं प्रमाण
सलीम मलिक@रामनगर। भारत में गैंडों की चर्चा के बीच में अमूमन असम, उत्तर बंगाल, नेपाल और दुधवा जैसे क्षेत्रों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन एक वह भी दौर था जब उत्तराखंड की तराई भी गैंडों की मौजूदगी की गवाह रही है। यह खुलासा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व द्वारा वाइल्ड लाइफ वीक के दौरान आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल के आखिरी दिन एक परिचर्चा की दौरान प्रसिद्ध लेखक, स्पीकर और वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ रजा काजमी ने किया।
गोल्डन टस्कर रिजॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रजा काजमी ने बताया कि आज गैंडों को मुख्य रूप से असम, नेपाल और नॉर्थ बंगाल से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इतिहास के पन्नों में उत्तराखंड में भी गैंडों की मौजूदगी के प्रमाण मिलते हैं। भारत में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए गैंडे के शुरुआती चित्रों में से एक उत्तराखंड में ही तैयार किया गया था। काजमी के मुताबिक करीब 200 साल पहले अंग्रेज चित्रकार थॉमस डेनियल और उनके भतीजे विलियम डेनियल भारत भ्रमण पर निकले थे। दोनों कलाकार भारत के अलग-अलग हिस्सों के भूगोल, प्रकृति और वन्यजीवों के चित्र तैयार कर रहे थे। इसी दौरान वह गढ़वाल के श्रीनगर क्षेत्र में जाने के दौरान राजा की अनुमति के लिए कोटद्वार क्षेत्र पहुंचे तो यहां उन्होंने एक नदी के किनारे गैंडे को पानी पीते हुए देखा था।
दोनों चित्रकार गैंडे को देखने के लिए उसके काफी करीब पहुंचे और उसका स्केच तैयार किया। बाद में इसी स्केच के आधार पर गैंडे की पेंटिंग बनाई गई। रजा काजमी के अनुसार, उस समय गैंडे को वहां से भगाने के लिए गोली भी चलाई गई थी।
उन्होंने बताया कि यह घटना इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि उत्तराखंड की तराई में कभी गैंडों की मौजूदगी थी। इतना ही नहीं गैंडों के ऐतिहासिक विस्तार की बात करें तो पश्चिम में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर क्षेत्र की तराई तक और उससे भी पहले मुगलकालीन दस्तावेजों में पेशावर तक गैंडों के पाए जाने का उल्लेख मिलता है। तराई क्षेत्र में खेती के लिए कटते जंगलों के चलते गैंडों का नेचुरल हैवीवेट प्रभावित होने के कारण आज गैंडों का प्राकृतिक क्षेत्र काफी सीमित हो चुका है।
वर्तमान में भारत के मुख्य रूप से असम, उत्तर बंगाल और उत्तर प्रदेश के दुधवा तथा नेपाल के कुछ क्षेत्रों में गैंडे पाए जाते हैं। ऐसे में उत्तराखंड में गैंडों की ऐतिहासिक मौजूदगी से जुड़ी यह जानकारी कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और इसके आसपास की जैव विविधता और वन्यजीव इतिहास की एक बेहद दिलचस्प और अनसुनी कहानी सामने लाती है।
