- चार दिशाओं से शुरू होगी न्याय यात्रा
- गांव-गांव तक पहुंचने की तैयारी
- भाजपा सरकार को घेरने, संगठन में जान फूंकने और जनता का भरोसा जीतने की चुनौती
देहरादून@राष्ट्रीय विचार। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी आहट के बीच कांग्रेस ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। प्रदेशभर में 22 अक्टूबर से शुरू होने जा रही ‘उत्तराखंड न्याय यात्रा’ को पार्टी की इसी चुनावी रणनीति के अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। चार अलग-अलग दलों के जरिए प्रदेश के चारों कोनों में पहुंचने की तैयारी कांग्रेस के उस इरादे को जाहिर करती है, जिसके तहत वह चुनाव से पहले भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने, जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना चाहती है।
कांग्रेस ने इस यात्रा के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, चुनाव अभियान समिति और चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारा है। यात्रा का नेतृत्व केवल राजनीतिक संदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी के प्रभाव, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों पर जनता की प्रतिक्रिया को भी परखने का अवसर मिलेगा। ऐसे में न्याय यात्रा को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की शुरुआती चुनावी लामबंदी के रूप में देखा जा रहा है।
चार दिशाओं से घेराबंदी, हर क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश
कांग्रेस की रणनीति के तहत पहला दल अल्मोड़ा के गोलज्यू मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पश्चिम बंगाल प्रभारी प्रकाश जोशी, सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक तिलकराज बेहड़ के नेतृत्व में कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए आगे बढ़ेगा। 22 से 24 अक्टूबर तक रानीखेत, खैरना, भवाली, भीमताल, हल्द्वानी, लालकुआं, किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता, खटीमा, रुद्रपुर, गदरपुर, बाजपुर, काशीपुर और जसपुर तक पहुंचने का कार्यक्रम है। 25 अक्टूबर को हल्द्वानी में पत्रकार वार्ता के साथ इस दल की यात्रा का समापन प्रस्तावित है।
दूसरा दल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में बदरीनाथ धाम से यात्रा शुरू करेगा। विधायक विक्रम सिंह नेगी और लखपत सिंह बुटोला के साथ यह दल चमोली, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, गौचर और रुद्रप्रयाग तक पहुंचेगा। इसके बाद सतपुली, दुगड्डा, कोटद्वार, लैंसडाउन और बीरोंखाल में कार्यक्रम होंगे। 26 अक्टूबर को गैरसैंण में विधानसभा घेराव की तैयारी बैठक भी प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम को पहाड़ के मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
तीसरे दल की जिम्मेदारी चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला को दी गई है। यह दल देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राजपुर, मसूरी, सहसपुर, विकासनगर, त्यूनी, कैंट, धर्मपुर और ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा करेगा। त्यूनी में 24 अक्टूबर को विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन का कार्यक्रम भी रखा गया है। प्रीतम सिंह इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर को गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र में शामिल होंगे।
वहीं, चौथे दल का नेतृत्व चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और विधायकों काजी निजामुद्दीन, ममता राकेश, फुरकान अहमद, रवि बहादुर, वीरेंद्र कुमार जाति तथा अनुपमा रावत को सौंपा गया है। यह दल 23 अक्टूबर को हरिद्वार शहर से यात्रा शुरू करेगा। इसके बाद हरिद्वार ग्रामीण, खानपुर, मंगलौर, झबरेड़ा, भगवानपुर, रुड़की, लक्सर और ज्वालापुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इस क्षेत्र में पार्टी का जोर स्थानीय मुद्दों के साथ अपने पारंपरिक राजनीतिक आधार को मजबूत करने पर रह सकता है।
भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की तैयारी
उत्तराखंड में लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई भाजपा के सामने 2027 में जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती होगी। दूसरी ओर कांग्रेस के सामने सत्ता में वापसी के लिए केवल सरकार की आलोचना करना पर्याप्त नहीं होगा। उसे जनता के बीच एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में अपनी जगह बनानी होगी। न्याय यात्रा इसी चुनौती से निपटने का प्रयास है।
यात्रा के जरिए कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, भर्ती प्रक्रियाओं, भ्रष्टाचार के आरोपों, महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना सकती है। हालांकि, इन मुद्दों को प्रभावी चुनावी अभियान में बदलने के लिए पार्टी को स्थानीय समस्याओं पर स्पष्ट रुख, ठोस समाधान और सरकार के सामने जवाबदेही के सवाल रखने होंगे।
कांग्रेस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि यात्रा केवल नेताओं के भाषणों और स्वागत कार्यक्रमों तक सीमित न रह जाए। यदि पार्टी जनता की शिकायतें सुनने, स्थानीय समस्याओं को दर्ज करने और उनके समाधान के लिए ठोस राजनीतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने में सफल रहती है, तो यह यात्रा चुनाव से पहले उसके पक्ष में माहौल बनाने का माध्यम बन सकती है।
दिग्गजों की मौजूदगी, संगठन की एकजुटता की परीक्षा
न्याय यात्रा में कांग्रेस के कई बड़े चेहरों को जिम्मेदारी देना पार्टी की गंभीरता को दर्शाता है। लेकिन उत्तराखंड कांग्रेस की वास्तविक परीक्षा नेताओं की मौजूदगी से आगे बढ़कर संगठनात्मक एकजुटता और साझा चुनावी रणनीति पर होगी। अलग-अलग क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में यात्रा निकालना तभी प्रभावी होगा, जब जिला, ब्लॉक और विधानसभा स्तर के कार्यकर्ता एक लक्ष्य के साथ काम करें।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की भागीदारी को लेकर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी। प्रदेश कांग्रेस मीडिया चेयरमैन राजीव महर्षि के अनुसार पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद, प्रदेश पदाधिकारी, एआईसीसी और पीसीसी सदस्य तथा विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी इसमें भाग लेने के लिए कहा गया है।
यह भागीदारी कांग्रेस के लिए शक्ति प्रदर्शन का अवसर तो है ही, साथ ही यह देखने की कसौटी भी होगी कि पार्टी अपने सभी प्रमुख नेताओं और गुटों को एक साझा मंच पर कितनी प्रभावी ढंग से ला पाती है। चुनावी राजनीति में कार्यकर्ताओं का उत्साह तभी वोट में बदलता है, जब उसके पीछे निरंतर जनसंपर्क और स्पष्ट राजनीतिक दिशा हो।
गैरसैंण विधानसभा घेराव की तैयारी से आगे का संदेश
कांग्रेस की यात्रा के दौरान गैरसैंण में विधानसभा घेराव की तैयारी बैठक का कार्यक्रम भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी जनसंपर्क अभियान को विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की रणनीति से जोड़ना चाहती है। हालांकि, यात्रा और विधानसभा घेराव की तैयारियों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस किन मुद्दों को प्राथमिकता देती है और उन पर सरकार से किस तरह जवाब मांगती है।
पार्टी के सामने एक और चुनौती पहाड़ और मैदान के मुद्दों के बीच संतुलन बनाने की होगी। कुमाऊं, गढ़वाल, देहरादून और हरिद्वार के सामाजिक-आर्थिक सवाल अलग-अलग हैं। ऐसे में पूरे प्रदेश के लिए एक समान राजनीतिक नारा देने के बजाय क्षेत्रीय समस्याओं के अनुरूप कार्यक्रम और समाधान सामने रखना कांग्रेस के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।
यात्रा की सफलता से तय होगी चुनावी जमीन
‘उत्तराखंड न्याय यात्रा’ को कांग्रेस की 2027 की चुनावी तैयारी का शुरुआती बड़ा अभियान माना जा सकता है। इससे पार्टी को अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाने, जनता के बीच मुद्दे उठाने और भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक विमर्श तैयार करने का अवसर मिलेगा। लेकिन किसी यात्रा की सफलता का आकलन केवल उसके मार्ग, नेताओं की संख्या या भीड़ से नहीं किया जा सकता।
असली सवाल यह होगा कि यात्रा के बाद कांग्रेस जनता के बीच कितनी सक्रिय रहती है, उठाए गए मुद्दों पर कितना ठोस काम करती है और क्या वह चुनाव से पहले एकजुट नेतृत्व, स्पष्ट एजेंडे तथा विश्वसनीय विकल्प की छवि बना पाती है।
भाजपा के लिए भी यह यात्रा विपक्ष की सक्रियता और जनता के बीच उठ रहे सवालों का राजनीतिक संकेत होगी। फिलहाल कांग्रेस ने चार दिशाओं से यात्रा शुरू कर चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। अब देखना यह है कि यह पहल केवल राजनीतिक हलचल पैदा करती है या वास्तव में 2027 के विधानसभा चुनाव की जमीन पर कांग्रेस के लिए नए अवसर भी तैयार करती है।
