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Rahul Gandhi questions the Dhami government’s Uttarakhand investment claims, alleging lack of transparency in the Global Investors Summit and demanding a list of 3,300 investors.
- राहुल बोले- ‘निवेश कागजों पर, रोजगार नारों में’, युवाओं के हिस्से में पेपर लीक
- धरातल पर मेल नही खा रहे निवेश के आकड़े
- रोड शो में फूंके 100 करोड़
- धामी बताएं, कितना निवेश हुआ और कितना मिला रोजगार
नई दिल्ली@ Rashtriya Vichar। उत्तराखंड में निवेश के दावों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए निवेश के आंकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से 3,300 निवेशकों की पूरी सूची सार्वजनिक करने की मांग की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने निवेश के बड़े-बड़े आंकड़े पेश किए, लेकिन धरातल पर उनकी वास्तविकता अलग नजर आ रही है।
राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 1,779 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के जरिए 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया गया था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोडशो पर जनता के करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बाद सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को धरातल पर उतारने का दावा किया। कांग्रेस नेता ने इन आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि वास्तव में कितना निवेश आया और उससे कितने रोजगार सृजित हुए।
आटा चक्कियों और खाद-बीज की दुकानों को किया निवेश सूची में शामिल: राहुल गांधी ने न्यूज पोर्टल न्यूज़लॉन्ड्री की पड़ताल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि निवेश की सूची में आटा चक्कियों, खाद-बीज की दुकानों और छोटे क्लीनिकों तक को शामिल किया गया। रिपोर्ट में कुछ ऐसे कारोबारियों का भी उल्लेख है, जिन्हें निवेशक के रूप में सूचीबद्ध किए जाने की जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में सरकारी बिजली कंपनियों से जुड़ी 35,279 करोड़ रुपये की परियोजनाएं भी शामिल हैं। एक स्कूल को भी 24.49 करोड़ रुपये के निवेश से जोड़े जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
दुबई और लंदन में आयोजित रोडशो पर उठाए सवाल: कांग्रेस नेता ने दुबई और लंदन में आयोजित रोडशो से 27,975 करोड़ रुपये के निवेश के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निवेश की परिभाषा में समिट से ठीक सात दिन पहले, एक दिसंबर 2023 को बदलाव किया गया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहले नियमों में ढील दी गई और फिर निवेश के आंकड़े पेश किए गए।
कागजों पर चल रहा निवेश: उन्होंने राज्य में युवाओं के रोजगार के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि निवेश कागजों पर है, रोजगार नारों में है और उत्तराखंड के युवाओं के हिस्से में पेपर लीक आ रहे हैं। राहुल गांधी के आरोपों के बाद निवेश के दावों और उनकी वास्तविक प्रगति को लेकर राज्य की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है।
