The seventh cultural evening of the 50th Kunjapuri Mela witnessed a huge turnout as Garh Ratna Narendra Singh Negi and dancer Diksha Badoni enthralled audiences with captivating performances.
- नेगी दा और पुत्र कविलाश की जुगलबंदी ने बांधा समां,
- दीक्षा बडोनी के हाई-एनर्जी डांस ने दर्शकों को थिरकने पर किया मजबूर
वाचस्पति रयाल@ नरेंद्रनगर। ऐतिहासिक सिद्धपीठ मां श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित सातवीं सांस्कृतिक संध्या लोक संस्कृति, संगीत और उत्साह के नाम रही। प्रसिद्ध लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी और मशहूर डांसर दीक्षा बडोनी की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। नेगी दा के सदाबहार गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा, वहीं दीक्षा बडोनी के ऊर्जावान नृत्य ने दर्शकों को अपनी जगह से उठकर थिरकने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग पहुंचे और देर रात तक सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मेला संरक्षक एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मेला समिति अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, विनीता बिष्ट और गजा नगर पंचायत अध्यक्ष कुंवर सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मुख्य कलाकार नरेंद्र सिंह नेगी और प्रसिद्ध डांसर दीक्षा बडोनी को शॉल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
मंच से दर्शकों को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने नरेंद्र सिंह नेगी के सांगीतिक सफर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि करीब 40 से 45 वर्ष पहले जब नेगी सूचना विभाग, टिहरी गढ़वाल में कार्यरत थे, तब उनके गीतों और सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत इसी नरेंद्रनगर और कुंजापुरी मेले के मंच से हुई थी। उन्होंने नेगी दा के योगदान की सराहना करते हुए उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मेले के आयोजन के लिए दानदाताओं ने बढ़ाए हाथ
सांस्कृतिक संध्या के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मेले के सफल आयोजन और भव्यता में सहयोग देने वाले दानदाताओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रसिद्ध समाजसेवी दिनेश चमोली ने 21 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की है। इसके अतिरिक्त वेस्टर्न ग्रुप (वेस्टर्न होटल) की ओर से 20 लाख रुपये और ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान की ओर से 10 लाख रुपये का सहयोग दिया गया है। मंत्री ने इस योगदान के लिए सभी दानदाताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से मेले के आयोजन को बेहतर बनाने और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
पिता-पुत्र की जुगलबंदी ने जीता दिल
सांस्कृतिक संध्या का सबसे यादगार क्षण तब आया, जब गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी मंच पर पहुंचे। उनके स्वागत में पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद नेगी दा ने अपने सुपुत्र कविलाश नेगी के साथ सुर से सुर मिलाकर लोकप्रिय गढ़वाली गीत ‘मेरे को पहाड़ी ना बोलो’ प्रस्तुत किया। पिता-पुत्र की इस जुगलबंदी ने दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरा माहौल संगीतमय हो गया।
इसके बाद नरेंद्र सिंह नेगी ने ‘तेरो मछोई’, ‘नारंगी की दाणी हो’, ‘नौछमी नरैणा’ और ‘क्या दिन क्या रात’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियां दीं। उनके गीतों में पहाड़ की संस्कृति, जनजीवन और लोकभावनाओं की झलक देखने को मिली। दर्शकों ने हर प्रस्तुति का तालियों और उत्साह के साथ स्वागत किया।
दीक्षा बडोनी के डांस पर झूमे दर्शक
कार्यक्रम में मशहूर डांसर दीक्षा बडोनी की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। मंच पर आते ही उन्होंने अपने तेजतर्रार अंदाज और हाई-एनर्जी डांस मूव्स से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘झुमकी’, ‘मेरी पहाड़न’ और ‘नखर्याली’ जैसे गीतों पर उनकी प्रस्तुतियों ने पंडाल में नई ऊर्जा भर दी। उनकी शानदार प्रस्तुतियों के दौरान दर्शक अपनी कुर्सियां छोड़कर थिरकने लगे।
मेले की सातवीं सांस्कृतिक संध्या ने लोक संगीत और आधुनिक नृत्य का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा। स्वर्ण जयंती वर्ष में आयोजित इस कार्यक्रम ने कुंजापुरी मेले की सांस्कृतिक गरिमा और लोकप्रियता को एक बार फिर रेखांकित किया।
