Pithoragarh Sela Village Waits 13 Years for Permanent Bridge, Villagers Warn of Election Boycott
- वर्ष 13 की आपदा में टूटा था पुल
- नहीं जागा सिस्टम
- स्थायी समाधान की मांग को लेकर आंदोलन के मूड में ग्रामीण
नदीम परवेज@ धारचूला। पिथौरागढ़ जिले की सेला ग्राम सभा के ग्रामीण पिछले 13 वर्षों से एक स्थायी पुल का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2013 की आपदा में बहा पुल आज तक दोबारा नहीं बन सका है, जिससे हजारों ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी लगातार प्रभावित हो रही है। आपदा के बाद से प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकलने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे ग्रामीण: ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल अस्थायी पुल बनाने के नाम पर प्रक्रिया शुरू होती है, टेंडर जारी होते हैं लेकिन बरसात का मौसम आते ही यह व्यवस्था फिर ध्वस्त हो जाती है। इसके बाद ग्रामीणों को दोबारा जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है।
पहल हुई, पर परवान नही चढ़ पाई : स्थानीय लोगों के अनुसार सेला में मोटर पुल निर्माण की पहल शुरू हुई थी, लेकिन वर्तमान में काम बंद पड़ा है। निर्माण रुकने के कारणों को लेकर भी ग्रामीणों को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि वर्षों से अस्थायी व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी: ग्रामीणों ने बताया कि कई बार उन्होंने खुद श्रमदान कर अस्थायी रास्ते और पुल तैयार कर आवागमन बहाल किया है। बावजूद इसके उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। अब ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन तेज करने के साथ ही आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार पर विचार करने को मजबूर होंगे।
अधिकारी नही ले रहे सुध: हालांकि ग्रामीणों की इस चेतावनी पर अभी तक प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, वर्षों से चली आ रही इस समस्या ने पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रभावित इलाकों की उपेक्षा और विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
