Pithoragarh: Free Ration Wheat Found Contaminated with Bird Feathers and Rodent Droppings, PDS Quality Under Scanner
- मुफ्त राशन में गंदगी मिलने से मचा हड़कंप
- ग्रामीणों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
- जांच के दिए आदेश
पिथौरागढ़@Rashtriy Vichar। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले मुफ्त राशन की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सरकार गरीबों को मुफ्त राशन तो दे रही है लेकिन इसकी गुणवत्ता को परखना अक्सर भूल जाती है,जिससे आये दिन गंदगी भरा राशन वितरित करने की खबरें प्रदेश भर से आती रही हैं। इस बार मामला झूलाघाट क्षेत्र के मजिरकांडा गांव से सामने आया है, जहां सरकारी राशन के गेहूं में कबूतर के पंख, चूहे की बीट, पत्थर और अन्य अशुद्धियां मिलने का आरोप लगा है। घटना ने न केवल खाद्य वितरण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि गरीबों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे कथित खिलवाड़ को भी उजागर किया है।
ग्रामीण का आरोप: ग्राम पंचायत मजिरकांडा निवासी योगेश महर ने आरोप लगाया कि उनकी माता कुछ दिन पहले झूलाघाट स्थित सस्ते गल्ले की दुकान से गेहूं और चावल लेकर आई थीं। जब घर पर गेहूं साफ किया गया तो उसमें कबूतर के पंख, चूहे की बीट, पत्थर और अन्य गंदगी मिली। योगेश ने इसका वीडियो भी मीडिया को उपलब्ध कराया है।
स्वास्थ्य से खिलवाड़: योगेश महर का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सरकारी राशन पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि उन्हें दूषित खाद्यान्न दिया जाता है तो यह सीधे-सीधे उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। उनका सवाल है कि जिस अनाज को गरीबों के भोजन के लिए वितरित किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता की जांच आखिर किस स्तर पर की जा रही है।
नियमित जांच की मांग: मामला सामने आने के बाद क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते राशन की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं हुई तो इस तरह की लापरवाही किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। ग्रामीणों ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई तथा भविष्य में स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है।
व्यवस्था पर खड़े सवालों का नहीं मिलता जवाब: इस घटना ने व्यवस्था पर एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गरीबों के लिए चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं में गुणवत्ता की निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है और क्या जिम्मेदार तंत्र समय रहते ऐसी लापरवाहियों पर अंकुश लगा पाएगा।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है। संबंधित दुकान से राशन का नमूना वापस लिया जाएगा और उपभोक्ता को बेहतर गुणवत्ता का खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। निरीक्षक को मौके पर भेजकर जांच कराई जा रही है। यदि यह पाया जाता है कि खाद्यान्न गोदाम स्तर से ही खराब था, तो पूरे स्टॉक को वापस मंगाकर बदल दिया जाएगा। साथ ही जिले के अन्य राशन वितरण केंद्रों पर भी खाद्यान्न की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विनय कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
