Uttarakhand Sanskrit Secretary Deepak Kumar Inspects Model Sanskrit Village Nagla Tarai
- सचिव ने किया आदर्श संस्कृत ग्राम का निरीक्षण
- बोले, संस्कृत से रोजगार और संस्कृति दोनों को मिल रहा बढ़ावा
- नगला तराई की बैठक में उठी नई पहल की आवाज
Deharadun/US Nagar@RashtriyVichar#। शुक्रवार को ग्राम पंचायत नगला तराई में एक महत्वपूर्ण आयोजन में संस्कृत शिक्षा उत्तराखंड शासन के सचिव दीपक कुमार ने प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने आदर्श संस्कृत ग्राम के रूप में विकसित किए जा रहे नगला तराई का निरीक्षण भी किया। ग्राम सभा के बहुउद्देशीय भवन में आहुत विस्तृत समीक्षा बैठक में स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम प्रधान श्री देवेन्द्र सिंह और खण्ड विकास अधिकारी संजय कुमार गांधी द्वारा सचिव दीपक कुमार का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत करने से हुई। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षा प्राप्त कर रहे ग्राम के शिक्षार्थियों ने पारंपरिक शैली में संस्कृत स्वागत गीत, वंदना और श्लोक प्रस्तुत कर वातावरण को पूरी तरह संस्कृतमय बना दिया।
कार्यक्रम में करन चंद, प्रीति, इशारा खान, मेहरू निशा, मीणा थापा और रिंकू राणा ने अपने आत्म-परिचय के साथ-साथ संस्कृत श्लोक, गीत और वंदना प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। मीना थापा ने अपने विचार रखते हुए बताया कि दैनिक जीवन में संस्कृत मंत्रों का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसे अपनाने से मानसिक व आध्यात्मिक विकास संभव है।
विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की दी जानकारी
सचिव दीपक कुमार ने अपने संबोधन में देश के प्रथम संस्कृत ग्राम की अवधारणा और उत्तराखंड के उस राज्य के रूप में उभरने की चर्चा की, जहां सभी जनपदों में संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। उन्होंने उत्तराखंड संस्कृत संस्थान, निदेशालय, परिषद और विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्कृत को अब केवल भाषा नहीं, बल्कि रोजगार के एक मजबूत माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है।
श्रुति माध्यम का हो अधिकाधिक उपयोग
उन्होंने बताया कि संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा षोडश संस्कारों की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है और संस्कृत की अंतरराष्ट्रीय मांग को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से भी संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने और श्रुति माध्यम (सुनकर सीखने) का अधिकाधिक उपयोग करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं अतिथियों का आभार प्रदर्शन संस्कृत ग्राम की प्रशिक्षिका ललिता भट्ट द्वारा किया गया। इस अवसर पर खण्ड विकास अधिकारी संजय कुमार गांधी, सहायक खण्ड विकास अधिकारी चन्द्र शेखर जोशी, ग्राम प्रधान देवेन्द्र सिंह, सहायक निदेशक (संस्कृत), ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्रामोत्थान परियोजना एवं एनआरएलएम स्टाफ सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल संस्कृत के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि ग्रामीण स्तर पर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक बनकर उभरा।
