Explore Maa Kunjapuri Siddhpeeth in Tehri Garhwal, Uttarakhand, a revered shrine dedicated to Goddess Durga, known for its spiritual significance and vibrant Navratri celebrations.
वाचस्पति रयाल@ नरेंद्रनगर। उत्तराखंड की देवभूमि में अनेक ऐसे सिद्धपीठ हैं, जो धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक सौंदर्य के अद्भुत संगम के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। टिहरी गढ़वाल जिले में समुद्र तल से लगभग 1,676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां कुंजापुरी सिद्धपीठ भी इन्हीं प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मां दुर्गा को समर्पित यह धाम वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है। शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों की विशेष भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है।
देवी सती से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से आहत होकर देवी सती ने यज्ञकुंड में अपने प्राण त्याग दिए थे। पत्नी के वियोग में भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को विभिन्न भागों में विभक्त कर दिया। मान्यता है कि देवी सती का कुंज अर्थात धड़ का ऊपरी भाग इस क्षेत्र में गिरा था। इसी कारण यह स्थल शक्तिपीठ के रूप में पूजित हुआ। मां कुंजापुरी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इसी पौराणिक परंपरा से जुड़ी है।
तीन सिद्धपीठों से बनता है पवित्र शक्तित्रिकोण
टिहरी गढ़वाल जिले में मां कुंजापुरी, मां सुरकंडा देवी और मां चंद्रबदनी के सिद्धपीठों का विशेष धार्मिक महत्व है। स्थानीय धार्मिक परंपरा में इन तीनों धामों को पवित्र शक्तित्रिकोण के रूप में देखा जाता है। इन मंदिरों में वर्षभर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में इनका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
मां कुंजापुरी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुपम स्थल है। मंदिर की पहाड़ी से गंगोत्री, बंदरपूंछ, चौखंबा और स्वर्गारोहिणी जैसी हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं। इसके साथ ही ऋषिकेश, हरिद्वार और दून घाटी का विहंगम नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। नरेंद्रनगर से लगभग 11 किलोमीटर और ऋषिकेश से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह धाम धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
1974 से धार्मिक आस्था के साथ लोकसंस्कृति का उत्सव
मां कुंजापुरी की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से वर्ष 1974 से शारदीय नवरात्र के दौरान श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का आयोजन किया जा रहा है। समय के साथ यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख हिस्सा बन गया है। मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ स्थानीय लोकसंस्कृति, कला, खेल और सामाजिक गतिविधियों को मंच मिलता है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
विकास योजनाओं से भी जुड़ी है मेले की पहचान
श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेला अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ विकास की घोषणाओं के लिए भी जाना जाता है। मेले के उद्घाटन और समापन अवसरों पर विभिन्न मुख्यमंत्रियों द्वारा क्षेत्र के विकास से जुड़ी घोषणाएं की जाती रही हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और नरेंद्रनगर-रानीपोखरी मोटर मार्ग सहित विभिन्न विकास योजनाओं को क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के रूप में देखा जाता है।
इस तरह यह मेला धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन और विकास संबंधी अपेक्षाओं को सामने रखने का अवसर भी बनता रहा है।
मेले को भव्य स्वरूप देने में सुबोध उनियाल की भूमिका
श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले को वर्तमान भव्य स्वरूप देने में क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर उनके प्रयासों को मेले के विस्तार और आयोजन की व्यवस्थाओं से जोड़कर देखा जाता है। बताया जाता है कि शुरुआती दौर में लगभग चार हजार रुपये की धनराशि से शुरू हुए इस मेले का आयोजन अब करोड़ों रुपये के बजट तक पहुंच गया है।
उनियाल समाजसेवी और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहने के समय से ही इस मेले से जुड़े रहे हैं। बाद के वर्षों में उन्होंने इसके आयोजन को अधिक व्यापक और व्यवस्थित स्वरूप देने पर जोर दिया। शारदीय नवरात्र में मेले की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठकों में व्यवस्थाओं, वित्तीय संसाधनों, सुरक्षा, सुविधाओं और खेलकूद गतिविधियों की रूपरेखा तय की जाती है। मेले में दो दर्जन से अधिक खेल प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियों के आयोजन की योजना भी बनाई जाती है।
मां कुंजापुरी के प्रति श्रद्धा, स्थानीय लोकसंस्कृति की जीवंतता और विकास की आकांक्षाओं का संगम यह मेला नरेंद्रनगर क्षेत्र की विशिष्ट पहचान बन चुका है। धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के साथ स्थानीय लोगों को जोड़ने वाला यह आयोजन देवभूमि की परंपराओं और बदलते विकास की कहानी को एक साथ प्रस्तुत करता है।
