The fourth cultural evening of the 50th Kunjapuri Tourism and Development Fair in Narendra Nagar featured comedy by Sudesh Lehri and Rajiv Thakur and lively Himachali folk songs by Ajay Chauhan and Aju Tomar.
- हास्य और पहाड़ी गीतों ने बांधा समां, देर रात तक थिरका कुंजापुरी मेला
वाचस्पति रयाल@ नरेंद्रनगर। ऐतिहासिक 50वें सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की चौथी सांस्कृतिक संध्या हास्य और हिमाचली लोकगीतों के नाम रही। नरेंद्रनगर के मुख्य मेला ग्राउंड में आयोजित स्टार नाइट में मशहूर हास्य कलाकारों सुदेश लहरी और राजीव ठाकुर ने अपनी कॉमेडी से दर्शकों को खूब गुदगुदाया, वहीं हिमाचली लोक गायकों अजय चौहान और अजू तोमर के गीतों ने माहौल को संगीतमय बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे।
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक सुबोध उनियाल और नगर पालिका परिषद नरेंद्रनगर के अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान उपजिलाधिकारी आशीष घिल्डियाल, प्रकाश चंद्र रमोला, महेश गुसाईं, द्वारिका प्रसाद जोशी, सभासद साकेत बिजल्वाण, पुष्पा राणा, ममता देवी, विनीता देवी और पार्वती नौटियाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
मंच पर पहुंचे कलाकारों का कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और पालिकाध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार ने पहाड़ी टोपी पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कुंजापुरी मेला लोक संस्कृति, कला और क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन स्थानीय परंपराओं को नई पहचान देने के साथ ही कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच भी प्रदान करते हैं।
सुदेश लहरी और राजीव ठाकुर ने गुदगुदाया
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत बॉलीवुड और टेलीविजन के चर्चित हास्य कलाकार सुदेश लहरी और राजीव ठाकुर की प्रस्तुति से हुई। दोनों कलाकारों ने अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, मजेदार संवादों और चुटीले अंदाज से दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी प्रस्तुति के दौरान मेला ग्राउंड ठहाकों से गूंज उठा और दर्शकों ने जमकर आनंद लिया।
इसके बाद हिमाचल के सुप्रसिद्ध लोक गायक अजय चौहान और अजू तोमर ने मंच संभाला। दोनों गायकों ने अपने लोकप्रिय पहाड़ी गीतों से समां बांध दिया। जैसे-जैसे गीतों की धुन तेज हुई, दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया।
लोकगीतों पर देर रात तक थिरके दर्शक
कार्यक्रम के दौरान कलाकार मंच से उतरकर दर्शकों के बीच पहुंचे और अपनी प्रस्तुतियों से उन्हें झूमने पर मजबूर कर दिया। ‘रोहड़ू जाणा मेरी आमिये’, ‘शिलॉन्ग लागा मेला’, ‘लड़की सुहाणी’, ‘झुमके झुमके’ और ‘नाटी किंग’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर मेला परिसर में खूब रौनक रही। युवाओं ने पहाड़ी धुनों और नाटी की लय पर जमकर नृत्य किया। हास्य और लोक संगीत के अनूठे संगम ने चौथी सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
