- कॉर्बेट में सैलानियों की कमी से होटल-रिसॉर्ट और सफारी कारोबार प्रभावित
नीरज सती@ रामनगर,रा.वि.।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध संकट का असर अब भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक पर्यटन गतिविधियों को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर उत्तराखंड के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व Jim Corbett National Park पर पड़ रहा है।
वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले कॉर्बेट में इन दिनों सैलानियों की बुकिंग्स में बड़े पैमाने पर रद्दीकरण हो रहा है। इससे होटल, रिसॉर्ट, जीप सफारी ऑपरेटर, गाइड और होमस्टे संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पर्यटन कारोबारियों के अनुसार मार्च-अप्रैल कॉर्बेट का पीक सीजन होता है, लेकिन इस बार बुकिंग में लगभग 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की जा रही है।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर यात्रा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी, उड़ानों में व्यवधान और सुरक्षा चिंताओं के कारण देशी-विदेशी पर्यटक यात्रा योजनाओं को टाल रहे हैं। इसका सीधा असर कॉर्बेट जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर दिखाई दे रहा है।
रिसॉर्ट संचालक गणेश रावत का कहना है कि मौजूदा हालात में पर्यटन व्यवसाय पहले से ही नुकसान झेल रहा है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो मई-जून का सीजन भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने बताया कि 15 जून के बाद मानसून के कारण कॉर्बेट के कई जोन बंद हो जाते हैं, ऐसे में मौजूदा सीजन में आई गिरावट पूरे साल के कारोबार पर असर डाल सकती है।
स्थानीय पर्यटन व्यवसायी प्रेम सिंह ने बताया कि जीप सफारी, गाइडिंग और होमस्टे से जुड़े लोग बुकिंग कैंसिल होने से बेहद परेशान हैं। कॉर्बेट क्षेत्र में हजारों परिवार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पर्यटन उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में बुकिंग घटने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कॉर्बेट क्षेत्र के पर्यटन कारोबार को उबरने में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में पर्यटन से जुड़े कारोबारियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
