Women from Gram Chauki in Tehri’s Kirtinagar block are boosting their income through a banana chips unit supported by the Gramotthan-REAP project.
- छोटी बचत से बड़ा कदम
- केले के चिप्स से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्राम चौकी की महिलाएं
वाचस्पति रयाल@ कीर्तिनगर। विकासखंड की ग्राम चौकी की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर स्वरोजगार की नई मिसाल पेश की है। कभी छोटी-छोटी बचत तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब केले के चिप्स निर्माण से जुड़कर उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। गांव में शुरू हुई यह पहल महिलाओं को रोजगार देने के साथ स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़ने का काम भी कर रही है।
माणिकनाथ स्वायत्त सहकारिता के माध्यम से संचालित केला चिप्स निर्माण इकाई की शुरुआत 22 फरवरी 2026 को ग्रामोत्थान-रीप परियोजना के सहयोग से की गई थी। करीब 10 लाख रुपये की लागत से स्थापित इकाई के लिए आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में 6 से 7 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इससे सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। प्रतिदिन 6 से 7 महिलाएं चिप्स निर्माण, पैकेजिंग और अन्य कार्यों में भाग लेती हैं।
डीपीएम रीप बीके भट्ट ने बताया कि ग्रामोत्थान-रीप परियोजना के वित्तीय सहयोग से स्थापित इस इकाई ने महिलाओं को गांव में ही रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया है। फरवरी से सितंबर 2026 तक इकाई ने 1,45,700 रुपये का कारोबार किया, जबकि करीब 20,500 रुपये की शुद्ध बचत अर्जित की गई। उन्होंने बताया कि पहले समूह से जुड़ी महिलाएं करीब 100 रुपये प्रतिमाह तक बचत करती थीं, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से उनकी आय और बचत दोनों बढ़ने की दिशा में हैं।
समूह मोबिलाइजर प्रीति के अनुसार, इस पहल से करीब 400 से 500 महिलाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। गांव में ही रोजगार उपलब्ध होने से महिलाओं को काम के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। उन्होंने बताया कि इकाई के लिए कच्चा केला और अन्य आवश्यक सामग्री भी स्थानीय स्तर पर महिलाओं से खरीदी जाती है। इससे उत्पादन इकाई के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को भी आय का अतिरिक्त स्रोत मिल रहा है।
बाजार में केले के चिप्स की मांग बढ़ने के साथ महिलाएं उत्पादन और बिक्री का दायरा बढ़ाने में जुटी हैं। समूह से जुड़ी राखी और प्रीति का कहना है कि ग्रामोत्थान-रीप परियोजना से मिली मशीनरी और सहयोग ने उन्हें रोजगार का साधन देने के साथ आत्मनिर्भर बनने का विश्वास भी दिया है। उनका कहना है कि सरकारी सहयोग से गांव में ही रोजगार का अवसर मिला है, जिससे महिलाएं अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ग्राम चौकी की महिलाओं की यह पहल स्थानीय संसाधनों, सामूहिक प्रयास और सरकारी सहयोग के बेहतर तालमेल की मिसाल बनकर सामने आई है। छोटी बचत से शुरू हुआ सफर अब स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर बढ़ रहा है। महिलाएं अपने उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के साथ गांव में ही एक स्थानीय उद्यम को मजबूत करने में जुटी हैं।
