Badrinath Donation Box Cash Misappropriation Probe Enters Crucial Phase, High-Power Committee Reviews CCTV
- 2 जुलाई की हर गतिविधि पर पैनी नजर
- दान गणना कक्ष में घंटों चली जांच
- फॉरेंसिक जांच से खुलेंगे कई राज
बदरीनाथ/देहरादून@Rashtriy Vichar।
बदरीनाथ धाम के दानपात्र (थाली भेंट) से कथित नकदी हेराफेरी और चोरी के मामले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। उत्तराखंड शासन द्वारा गठित गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय हाई पावर जांच समिति सोमवार को बदरीनाथ पहुंची और करीब साढ़े तीन घंटे तक दानपात्रों की गणना प्रक्रिया, सीसीटीवी फुटेज, कैश काउंटिंग रूम, सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय अभिलेखों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान समिति ने पूरे घटनाक्रम को मिनट-दर-मिनट समझने का प्रयास किया।
समिति में जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक एवं एनएचएम उत्तराखंड के एमडी संदीप तिवारी तथा चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान भी शामिल रहे। टीम ने मंदिर परिसर, परिक्रमा मार्ग और दान गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों का निरीक्षण किया और दानपात्रों को स्ट्रांग रूम से गणना कक्ष तक लाने से लेकर बैंक में जमा कराने तक की पूरी प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया।
केवल घटना वाले दिन नहीं, कई दिनों की रिकॉर्डिंग खंगाली
जांच समिति ने केवल 2 जुलाई की घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज ही नहीं, बल्कि उससे पहले और बाद के दिनों की रिकॉर्डिंग भी कई बार देखी। लगभग एक घंटे तक कैश काउंटिंग कक्ष की वीडियो रिकॉर्डिंग का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया ताकि कर्मचारियों की गतिविधियों, नकदी की आवाजाही और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि 2 जुलाई को दानपात्रों की गणना के दौरान बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष के सरकारी पीए एवं प्रोटोकॉल अधिकारी प्रमोद नौटियाल पर गणना कक्ष से नकदी निकालने का आरोप लगा था। मामले के सामने आने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। बीकेटीसी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज होने के बाद चमोली पुलिस ने 12 जुलाई की देर रात देहरादून से उन्हें गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए हाई पावर कमेटी गठित की।
फॉरेंसिक और साइबर जांच से खुलेगी सच्चाई
समिति के सदस्य संदीप तिवारी ने बताया कि पहले चरण में सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की तैनाती, बैंक कर्मियों की भूमिका, सीसीटीवी निगरानी और दान गणना की पूरी प्रणाली की जांच की गई है। आरोपी की गतिविधियों का भी सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से विस्तार से परीक्षण किया गया है।
उन्होंने बताया कि अगले चरण में शिकायतकर्ता सहित संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि किसी अन्य व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है तो उसे भी समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जांच समिति आवश्यक वित्तीय दस्तावेज अपने कब्जे में ले रही है, जबकि सभी सीसीटीवी फुटेज का तकनीकी विश्लेषण फॉरेंसिक विशेषज्ञों और साइबर सेल की मदद से कराया जाएगा।
जांच पूरी होने पर होगी आगे की कार्रवाई:आयुक्त
गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप ने कहा कि समिति ने फिलहाल पूरी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया है। पुलिस अपनी स्वतंत्र जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे प्रकरण में केवल एक व्यक्ति की भूमिका थी या किसी बड़े नेटवर्क की संलिप्तता भी सामने आती है।
निरीक्षण में ये रहे शामिल
निरीक्षण के दौरान बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ, थाना प्रभारी बदरीनाथ महाजन उनियाल, पुलिस उपनिरीक्षक मदन सिंह बिष्ट, सहायक लेखाधिकारी भूपेंद्र रावत, मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पाण सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
