USCIRF Hearing Sparks Debate Over India, Calls for ‘Country of Particular Concern’ Status Intensify
- देश में हिंदुत्व और धार्मिक स्वतंत्रता पर छिड़ी बहस
- अमेरिकी मंच पर भारतीय नेताओं और हिंदुत्व संगठनों का हुआ खुलकर जिक्र
देहरादून@Rashtriy Vichar#।
अमेरिका की संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) की हालिया सुनवाई में भारत के कुछ प्रमुख राजनीतिक नेताओं और हिंदुत्व से जुड़े संगठनों का जिक्र किए जाने के बाद राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर अमेरिकी कैपिटल हिल में एक विशेष सुनवाई आयोजित की, इस सुनवाई में गवाहों ने अमेरिकी सरकार से भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ घोषित करने और कुछ भारतीय संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। सुनवाई के दौरान एक्टिविस्ट रकीब अहमद नाइक ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की नीतियों और बयानों पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यह सुनवाई यूएससीआईआरएफ की अध्यक्ष विक्की हार्ट्ज़लर और उपाध्यक्ष आसिफ महमूद की अध्यक्षता में हुई, इसका उद्देश्य भारत में ईसाइयों, मुस्लिमों और सिखों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों के कथित उत्पीड़न के मामलों की समीक्षा करना था।
बजरंगदल,विहिप और आरएसएस भी निशाने पर: सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का भी उल्लेख किया गया। वक्ता ने आरोप लगाया कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चिंता बढ़ी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद जैसे विषयों पर वैश्विक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत में यह सवाल उठ रहा है कि क्या विदेशी मंचों पर भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं और निर्वाचित नेताओं को निशाना बनाना उचित है।
हालांकि, यूएससीआईआरएफ की ओर से अभी तक इस सुनवाई के बाद कोई औपचारिक विस्तृत टिप्पणी जारी नहीं की गई है। वहीं भारत सरकार पहले भी कई बार यूएससीआईआरएफ की रिपोर्टों और टिप्पणियों को पक्षपातपूर्ण बताते हुए खारिज कर चुकी है।
ट्रंप प्रशासन से भारत पर सख्ती की मांग
सुनवाई के दौरान आयोग ने ट्रंप सरकार से सिफारिश की है कि वे भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ घोषित करें और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए आरएसएस और रॉ जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करें।
देश में राजनैतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस घटनाक्रम के बाद देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। समर्थकों का कहना है कि जिन नेताओं का नाम लिया गया है, वे अपने-अपने राज्यों में कानून व्यवस्था, अवैध धर्मांतरण, अतिक्रमण और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। उनका मानना है कि भारतीय लोकतंत्र से जुड़े विषयों पर विदेशी मंचों पर इस प्रकार की टिप्पणी उचित नहीं है।
