- पेंशन बहाली की मांग तेज, आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन
- पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार: जगदीश चंद्र कुकरेती
- राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजेंगे पत्र
देहरादून। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन संचालित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) में पेंशन बंद किए जाने के विरोध में आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। दूसरे दिन भी पेंशनरों और कर्मचारियों ने संस्थान में तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया। इस आंदोलन को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का समर्थन भी मिला।
मंगलवार को संस्थान कर्मचारी संघ और सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और पेंशनर्स संस्थान के मुख्य द्वार पर एकत्रित हुए। जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन करते हुए उन्होंने पेंशन बहाल करने की मांग उठाई।
संघ अध्यक्ष जगदीश चंद्र कुकरेती ने कहा कि पेंशन कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है और इसे तत्काल बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों की सेवा के बाद पेंशन बंद करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि अमानवीय भी है।
इस दौरान जगदीश लखेड़ा और हरीश पंवार ने संस्थान को स्वायत्त बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वायत्तता के नाम पर कर्मचारियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। लोकेश नवानी ने पेंशन बंद करने के निर्णय को अमानवीय और अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि यह निर्णय सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है।
पेंशनरों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारी से मुलाकात की, जिन्होंने इस संबंध में संस्थान के निदेशक को पत्र भेजने की जानकारी दी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
धरना-प्रदर्शन में एस के गोयल, एस सी बिंजौला, एस पी बहुगुणा, बी डी शर्मा, विरेन्द्र सिंह, पवन शर्मा, राजकुमार बत्रा, एस डी गुप्ता, आर पी सिंह, किशन पाल, चंडी प्रसाद लखेड़ा, एच आर कुशवाह, नीरज गांधी, लक्ष्मी पोखरियाल सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स व कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर पेंशन बहाली का मुद्दा संसद में उठाने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संस्थान का नहीं, बल्कि देशभर के कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
