Sacred Til Oil Ritual for Badrinath Abhishek Held at Narendra Nagar Royal Palace
- नरेंद्रनगर राजमहल में परंपरा का संगम, बद्री विशाल के अभिषेक हेतु तिल का तेल तैयार
- सुसज्जित रथ पर विराजमान (गाडू घड़ी) तेल कलश शोभा यात्रा, बद्री धाम को कर गई प्रस्थान
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर। विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री विशाल के अभिषेक हेतु परंपरागत तिल तेल निर्माण की पवित्र प्रक्रिया मंगलवार को नरेंद्रनगर राजमहल में श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर महारानी राज्य लक्ष्मी शाह एवं उनकी पुत्री श्रीजा अरोड़ा की अगुवाई में नगर की 70 से अधिक सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर पीले वस्त्र धारण करते हुए पारंपरिक विधि से तिलों का तेल पिरोया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राजपुरोहित कृष्ण प्रसाद उनियाल द्वारा विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना के साथ कराया गया। राजमहल को फूल-मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया था और तेल निर्माण स्थल को विशेष रूप से अलंकृत किया गया।
महिलाओं ने मूसल, ओखली और सिलबट्टे के माध्यम से पारंपरिक तरीके से तिलों का तेल तैयार किया। इसके बाद तेल को शुद्ध पात्र में जड़ी-बूटियों के साथ पकाकर पूरी तरह शुद्ध किया गया। यह पवित्र तेल आगामी छह माह तक भगवान बद्री विशाल के अभिषेक में प्रयुक्त होगा, जिसे दिव्य मंत्रोच्चार के साथ ‘गाडू घड़ी’ कलश में स्थापित किया गया।
पूजन उपरांत मनु जयेंद्र शाह, महारानी राज्य लक्ष्मी शाह एवं श्रीजा अरोड़ा ने प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया। इसके बाद सुसज्जित रथ में विराजमान ‘गाडू घड़ी’ कलश को गाजे-बाजे और जयकारों के साथ बद्रीधाम के लिए रवाना किया गया।

यह पावन यात्रा ऋषिकेश, व्यासी, कौडियाला, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग होते हुए 22 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को प्रातः 6:15 बजे भगवान बद्रीनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
पूरे आयोजन में डिमरी केंद्रीय धार्मिक पंचायत के पदाधिकारी एवं स्थानीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। हल्की बूंदाबांदी के बीच शुरू हुए इस आयोजन में जैसे ही पूजा आरंभ हुई, मौसम साफ हो गया, जिसे श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल की कृपा माना।
तेल पिरोने की व्यवस्था बनाने में पंडित कमलेश चमोली, बद्री केदार समिति के सदस्य राज पाल जड़धाररी, नितेश चौहान, रजनीश कंसवाल आदि की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
