Uttarakhand High Court Slams State Over UPP Chief Prabhat Dhyani’s Preventive Detention
- कोर्ट का तीखा सवाल- किस कानून का हुआ उल्लंघन?
- सरकार के जवाब पर हाईकोर्ट की तीखी फटकार
- हिरासत पर उठाए सवाल
नैनीताल@Rashtriy Vichar। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका के आधार पर हिरासत में लेने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य की कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह गुंडागर्दी जैसी प्रतीत होती है।
कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि वह इस मामले को हल्के में नहीं लेगी और सरकार को अपने कदम का ठोस कानूनी आधार बताना होगा। राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला 19 जुलाई का है, जब प्रभात ध्यानी ने फेसबुक पर सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचने की घोषणा की थी। इसके बाद ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई को उनके सहयोगी लालमणि ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान सरकार ने बीएनएसएस की धारा 172 का हवाला देते हुए हिरासत को उचित ठहराया और कहा कि दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू थी। इस पर हाईकोर्ट ने तीखा सवाल किया कि दिल्ली में लागू निषेधाज्ञा का उत्तराखंड पुलिस से क्या संबंध है और बंदी ने आखिर किस कानून का उल्लंघन किया?
कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार की छवि जैसे तर्क व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को सीमित करने का आधार नहीं बन सकते। खंडपीठ की सख्त टिप्पणियों के बाद यह मामला राज्य सरकार के लिए कानूनी और संवैधानिक चुनौती बनता नजर आ रहा है।
