- बंद पड़ी सहकारी दवा इकाइयों का होगा कायाकल्प
- युवाओं को रोजगार और किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार
देहरादून@Rashtriy Vichar #Ranikhet #
उत्तराखंड सरकार ने लंबे समय से बंद पड़ी सहकारी दवा इकाइयों को फिर से जीवित करने की बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। रानीखेत स्थित को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री और हल्दूचौड़ की उत्तराखंड स्टेट मेडिसिन एंड पैरामेडिकल्स लिमिटेड (यूएमपीएल) का अब आधुनिक तकनीक और नई मशीनों के साथ कायाकल्प किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह पहल न केवल आयुर्वेद उद्योग को नई उड़ान देगी, बल्कि पहाड़ के युवाओं और किसानों के लिए भी रोजगार और आय का बड़ा जरिया बनेगी।
सोमवार को सहकारिता मंत्री Dhan Singh Rawat ने बताया कि उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के माध्यम से दोनों इकाइयों को आधुनिक स्वरूप देने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। वर्षों से निष्क्रिय पड़ी इन फैक्ट्रियों में अब अत्याधुनिक मशीनरी, आधुनिक लैब और गुणवत्ता आधारित उत्पादन व्यवस्था विकसित की जाएगी।
सरकार की योजना के तहत यहां महाशंख वटी, त्रिफला चूर्ण, महानारायण तैल समेत कई पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों का बड़े स्तर पर निर्माण किया जाएगा। इससे उत्तराखंड की आयुर्वेदिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
डा. रावत ने बताया कि इस परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा, जबकि औषधीय पौधों की खेती करने वाले एक हजार से ज्यादा किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इसके अलावा पैकेजिंग, परिवहन और मार्केटिंग से जुड़े हजारों लोगों के लिए भी आजीविका के अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने इन इकाइयों के पूर्ण संचालन के बाद 100 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार और करीब 15 करोड़ रुपये तक लाभ का लक्ष्य तय किया है। मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड औषधीय और सुगंधित वनस्पतियों के मामले में देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल है और यह परियोजना सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास का मॉडल बन सकती है।
किसानों के लिए खुलेंगे नए अवसर
राज्य में जड़ी-बूटी और औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को अब बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है। सरकार स्थानीय उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता देने की तैयारी कर रही है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।
रोजगार के साथ बढ़ेगी आयुर्वेद की पहचान
रानीखेत और हल्दूचौड़ की इकाइयों के पुनर्जीवन को उत्तराखंड में आयुर्वेद उद्योग के विस्तार की बड़ी पहल माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य राज्य को आयुर्वेदिक उत्पादन और हर्बल उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।