No Special Event Held on Freedom Fighter Sridev Suman’s 110th Birth Anniversary in Narendranagar
- श्रीदेव सुमन की 110वीं जयंती पर नरेंद्रनगर में नहीं हुआ कोई आयोजन, लोगों में नाराजगी
- जल-जंगल की लड़ाई के महानायक थे श्रीदेव सुमन
- टिहरी राजशाही के खिलाफ बुलंद की थी आवाज
- जयंती पर संविधान निर्माता डॉ अंबेडकर को भी नही किया याद
वाचस्पति रयाल@ नरेंद्रनगर। टिहरी रियासत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी श्रीदेव सुमन की 110वीं जयंती पर कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित नहीं होने से लोगों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जिस महायोगी और बलिदानी स्वतंत्रता सेनानी ने जनता को राजशाही से मुक्ति दिलाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया, आज उसी महानायक को प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि भुलाते जा रहे हैं।
नगर में श्रीदेव सुमन के नाम पर करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से जिला उप चिकित्सालय स्थापित है। अस्पताल परिसर के अलावा मुख्य बाजार स्थित शहीद स्मारक स्थल पर भी उनकी प्रतिमा लगी हुई है, लेकिन जयंती के अवसर पर कहीं भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम या स्मरण आयोजन नहीं किया गया।
लोगों ने कहा कि श्रीदेव सुमन ने उस समय राजशाही के खिलाफ आवाज उठाई थी, जब पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। उन्होंने जनता के अधिकारों के लिए 84 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की और अंततः अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका बलिदान आज भी उत्तराखंड के इतिहास में अमर है।
शहर में यह चर्चा भी रही कि इससे पहले संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को भी उनके जन्मदिवस और परिनिर्वाण दिवस पर याद नहीं किया गया था। लोगों ने चिंता जताई कि यदि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को इसी तरह भुलाया जाता रहा तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और महानायकों से दूर हो जाएंगी।
