- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश में बीएनपी प्रमुख तारीक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में नही होंगे शामिल
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला हो सकते में समारोह में शामिल
- पूर्व निर्धारित कूटनीतिक कार्यक्रमों को माना जा रहा है कारण
- बोले- बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में नए दौर की शुरुआत के मिल रहे हैं संकेत ।
नई दिल्ली। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक़ रहमान के 17 फरवरी को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया था। हालांकि पीएम मोदी ने यह निमंत्रण अस्वीकार कर दिया क्योंकि वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुअल macron के साथ द्विपक्षीय वार्ता में व्यस्त रहेंगे और उसके बाद दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इम्पैक्ट समिट की अध्यक्षता करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस समारोह में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। मंत्रालय ने इसे भारत और बांग्लादेश के बीच गहरी मित्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताया। बीएनपी को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला है, जो बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह निमंत्रण अंतरिम सलाहकार मुहम्मद युनस द्वारा कूटनीतिक माध्यमों से भेजा गया था। कई सार्क देशों और एशियाई राष्ट्रों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर संभावित प्रभाव
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में ढाका और नई दिल्ली के संबंध बेहद मजबूत थे। भारत को बांग्लादेश का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार माना जाता था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
तारीक रहमान ने चुनाव अभियान के दौरान बंगलादेश बिफोर ऑल” यानी “सबसे पहले बांग्लादेश” का नारा दिया। उनका स्पष्ट संदेश था—“Friends, yes; Masters, no” अर्थात “दोस्ती स्वीकार है, लेकिन किसी की दखलअंदाजी नहीं।” यह बयान सीधे तौर पर भारत सहित सभी पड़ोसी देशों को संतुलित और सम्मानजनक संबंधों का संकेत देता है।
रहमान ने कहा है कि भारत के साथ संबंध आपसी सम्मान और आपसी समझ पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्ण सामान्यीकरण दोनों पक्षों की इच्छा पर निर्भर करेगा। शेख हसीना को भारत द्वारा शरण दिए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, यह केवल हमारे ऊपर नहीं, उन पर भी निर्भर करता है।
बीएनपी के घोषणा-पत्र में सीमा सुरक्षा, अवैध प्रवासन, बीएसएफ द्वारा कथित सीमा हत्याओं और तीस्ता व पद्मा जैसी नदियों के जल बंटवारे को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। पार्टी ने चीन समर्थित तीस्ता रिवर मास्टर प्लान को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं, जिससे भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ सकती हैं।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश में बीएनपी की वापसी दक्षिण एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। भारत को अब एक नई, अधिक मुखर और आत्मनिर्भर नेतृत्व वाली सरकार के साथ संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति अपनानी होगी।
