- छह साल बाद फिर खुला भारत-तिब्बत व्यापार
- कारोबारी रिश्तों को मिली नई रफ्तार
- तकलाकोट पहुंचा 20 व्यापारियों का पहला दल
- सीमांत कारोबार में लौटी रौनक
नदीम परवेज@ धारचूला। करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद भारत-तिब्बत व्यापार एक बार फिर शुरू होने से सीमांत क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है। भारतीय व्यापारियों का 20 सदस्यीय पहला दल चीन के तिब्बत स्थित तकलाकोट पहुंच गया है। व्यापारियों ने वहां अपनी व्यापारिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। लंबे इंतजार के बाद व्यापार शुरू होने से कारोबारियों में उत्साह का माहौल है।
तिब्बत के रास्ते चायना भेजे जा रहे व्यापारी : प्रशासन की अनुमति और चीन की स्वीकृति के बाद भारतीय व्यापारियों को 20-20 के दल में तिब्बत भेजा जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद बंद व्यापार मार्ग के दोबारा खुलने को दोनों देशों के सीमांत व्यापारिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बार युवा व्यापारी हैं शामिल: इस बार व्यापार में कई युवा व्यापारी भी शामिल हुए हैं। इससे कारोबार में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। व्यापारियों का कहना है कि व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से सीमांत धारचूला के साथ आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय बाजारों में कारोबार बढ़ने और रौनक लौटने की उम्मीद है।
व्यापारियों ने भारत सरकार का जताया आभार: भारत-तिब्बत व्यापार अध्यक्ष जीवन सिंह रोकलीं ने व्यापार मार्ग खोलने के लिए प्रशासन, भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि व्यापार बहाली से सीमांत व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
सीमांत व्यापार होगा मजबूत: महासचिव दौलत रायपा ने कहा कि व्यापारियों के लगातार प्रयासों के बाद छह साल से बंद मार्ग फिर खुला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत-तिब्बत के बीच सीमांत व्यापार और मजबूत होगा। छह साल बाद व्यापार मार्ग खुलने से धारचूला में सिर्फ कारोबार ही नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के पारंपरिक व्यापारिक रिश्तों और आर्थिक गतिविधियों को भी नई उम्मीद मिली है।
