- 15-20 करोड़ बह गए, पुल फिर ध्वस्त
- 10 हजार से अधिक आबादी पर संकट
- गुंजी में फंसा कैलास मानसरोवर यात्रा का नौवां दल
नदीम परवेज@ धारचूला। कुलागाड़ में हर साल पुल टूटने की घटना अब महज आपदा नहीं, बल्कि व्यवस्था और स्थायी समाधान पर बड़ा सवाल बन चुकी है। इस बार करीब 40 मीटर स्पैन का पुल नाले के तेज बहाव में बह गया। इससे धारचूला क्षेत्र की 10 हजार से अधिक आबादी की आवाजाही प्रभावित हुई है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 में करीब पांच-पांच करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए सीमेंट के पुल भी धराशायी हो चुके हैं। लगातार करोड़ों खर्च होने के बावजूद समस्या जस की तस है।

पुल टूटने से बीमार, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और आपातकालीन मामलों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कैलास मानसरोवर और आदि कैलास यात्रा का मार्ग होने के कारण कुलागाड़ की अहमियत और बढ़ जाती है। फिलहाल BRO ग्रिफ-67 और हिलवेज कंपनी की टीमें मार्ग खोलने में जुटी हैं। NDRF और तहसील प्रशासन भी मौके पर तैनात है। प्रशासन यातायात बहाल करने का प्रयास कर रहा है। इधर कैलास मानसरोवर यात्रा का नौवां दल गुंजी में फंसा है। मार्ग खुलने के बाद ही यात्रियों की धारचूला वापसी संभव होगी।

स्थानीय लोगों का सवाल साफ है—जब हर साल करोड़ों रुपये अस्थायी व्यवस्था पर खर्च हो रहे हैं तो सुरक्षित अलाइनमेंट तलाशकर स्थायी पुल क्यों नहीं बनाया जा रहा? आखिर कुलागाड़ कब तक हर बरस टूटता रहेगा?

BRO से बातचीत जारी है। BRO ने उपयुक्त अलाइनमेंट नहीं मिलने की बात कही है और मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। जिलाधिकारी स्तर से संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आशीष जोशी, एसडीएम,धारचूला।
