Uttarakhand High Court seeks an affidavit from the Secondary Education Director over the imbalance in teacher transfers from remote to accessible areas.
- शिक्षकों के असंतुलन पर कोर्ट सख्त
- अदालत ने कहा, असंतुलन दूर करने के अब तक क्या कदम उठाए गए
- लेक्चरर के 189 शिक्षकों को दुर्गम से भेजा सुगम
- जबिक 4 शिक्षक भेजे दुर्गम
देहरादून@Rashtriya Vichar। उत्तराखंड में शिक्षकों के दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में तबादलों के असंतुलन पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सवाल उठाया कि दुर्गम क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिक्षकों को सुगम क्षेत्रों में भेजे जाने के बाद इन क्षेत्रों की शिक्षण व्यवस्था और शिक्षा के स्तर को कैसे बनाए रखा जाएगा। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से शपथपत्र दाखिल कर इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जीवन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। अदालत ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से यह भी बताने को कहा है कि तबादलों में पैदा हुए असंतुलन को दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे इसका समाधान किस तरह किया जाएगा। मामले की सुनवाई मंगलवार को हुई थी।
सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से पेश आंकड़ों ने दुर्गम और सुगम क्षेत्रों के बीच तबादलों के बड़े अंतर को सामने रखा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अनुसार लेक्चरर ग्रेड में 189 शिक्षकों को दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया, जबकि सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में महज चार शिक्षकों का तबादला हुआ। कुमाऊं मंडल में एलटी ग्रेड के 133 शिक्षक दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में भेजे गए, जबकि विपरीत दिशा में केवल तीन शिक्षक गए।
प्राथमिक शिक्षा संवर्ग में भी तस्वीर बहुत अलग नहीं रही। यहां 171 शिक्षक दुर्गम से सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरित किए गए, जबकि सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में 52 शिक्षकों को भेजा गया।
अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाणपत्रों से संबंधित दस्तावेज भी पेश किए। सुनवाई के दौरान इस असंतुलन को दूर करने के लिए अतिथि शिक्षकों की मदद लेने का सुझाव दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल निर्देशों में यह स्पष्ट नहीं है कि इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर जवाब मांगा है कि दुर्गम क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिक्षकों के सुगम क्षेत्रों में जाने के बाद वहां की शिक्षण व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता किस तरह बरकरार रखी जाएगी। अदालत के रुख से साफ है कि शिक्षकों के तबादलों में दुर्गम क्षेत्रों की जरूरत और सुगम क्षेत्रों की मांग के बीच बने असंतुलन का जवाब अब शिक्षा विभाग को देना होगा।
कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिए गए निर्णय को एक सप्ताह में रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
