- भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं, वहीं विपक्ष ने इसे कृषि और ग्रामीण आजीविका के लिए खतरा बताया है।
नई दिल्ली: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा देश की राजनीति में नए विवाद का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने इस समझौते की कड़ी आलोचना की है, जबकि सरकार इसे अर्थव्यवस्था और निर्यातकों के लिए फायदेमंद बता रही है।
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर किसानों के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे “भारत के 72 करोड़ किसानों के पेट पर चोट” बताया। सुरजेवाला ने आशंका जताई कि अमेरिकी कृषि उत्पादों — जैसे मक्का, सोयाबीन, ज्वार (सोरघम), अखरोट, बादाम, पिस्ता, सेब, संतरे और प्रसंस्कृत फल — के आयात से भारतीय बाजार भर जाएंगे, जिससे किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण समुदायों की आजीविका पर संकट आ सकता है।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा कि यह व्यापार समझौता किसानों, एमएसएमई, कारीगरों और शिल्पकारों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों के हितों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया है और कुछ लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं।
पीयूष गोयल ने बताया कि इस अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगाए जाने वाले प्रतिशोधात्मक शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह शुल्क चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ भारतीय उत्पादों — जैसे फल, सब्जियां, चाय और कॉफी — पर अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क (जीरो टैरिफ) लगेगा। इस ढांचे में मानकों और अनुरूपता प्रक्रियाओं पर सहयोग, भविष्य में टैरिफ बदलाव के लिए सुरक्षा प्रावधान और पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता भी शामिल है।
इसके अलावा, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान व विमान पुर्जे, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने की मंशा जताई है। साथ ही डेटा सेंटर से जुड़े तकनीकी उत्पादों सहित प्रौद्योगिकी व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।
