Uttarakhand Approves Voluntary Land Consolidation Policy 2026 to Boost Hill Agriculture
- 11 जिलों के 275 गांव चकबंदी से जुड़ेंगे
- पहाड़ की बिखरी खेती को मिलेगा नया स्वरूप
- कृषि विकास और पलायन रोकने को स्वैच्छिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति- 2026 को मंजूरी
देहरादून@Rashtriy vichar# Uttarakhand। राज्य सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को मजबूत बनाने और किसानों की परेशानियां कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए ‘स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026’ को मंजूरी दे दी गई। इस नीति का उद्देश्य पहाड़ों में बिखरी हुई कृषि भूमि को एक जगह व्यवस्थित करना है, ताकि खेती आसान हो सके और किसानों को अधिक लाभ मिल सके। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
नई नीति के तहत राज्य के 11 पर्वतीय जिलों में हर साल प्रत्येक जिले के 5 गांवों में चकबंदी का कार्य किया जाएगा। इस तरह अगले 5 वर्षों में कुल 275 गांवों को चकबंदी योजना से जोड़ा जाएगा।
सरकार ने साफ किया है कि चकबंदी के लिए केवल उन्हीं गांवों का चयन होगा, जहां किसी प्रकार का भूमि विवाद नहीं होगा। साथ ही चकबंदी क्षेत्र का न्यूनतम भूमि क्षेत्र 10 हेक्टेयर होना जरूरी रहेगा। यदि भूमि क्षेत्र इससे कम है तो कम से कम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।
सरकार ने यह भी तय किया है कि नीति लागू होने के तीन साल बाद इसके अनुभवों और सुझावों के आधार पर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, ताकि योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। किसानों और काश्तकारों को विशेष प्रोत्साहन और लाभ भी दिए जाएंगे। हालांकि यह लाभ चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा। सरकार का मानना है कि यह योजना पहाड़ों में खेती को नई दिशा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
आपसी सहमति से होगी चकबंदी
चकबंदी प्रक्रिया को पूरी तरह किसानों की सहमति और भागीदारी के आधार पर लागू किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना में किसी भी भू-स्वामी पर दबाव नहीं डाला जाएगा, बल्कि आपसी सहमति से भूमि का पुनर्गठन किया जाएगा। नीति के अनुसार संबंधित गांवों के काश्तकार और भू-स्वामी मिलकर अपनी जमीनों के बेहतर उपयोग और व्यवस्थित खेती के लिए चक निर्माण की योजना तैयार करेंगे। किसान स्वयं आपसी चर्चा और सहमति के आधार पर चकबंदी का प्रारूप बनाकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
टुकड़ों में बंटी कृषि भूमि होगी इकठ्ठी
सरकार का मानना है कि किसानों की सीधी भागीदारी से चकबंदी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विवाद रहित बनेगी। इससे छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी कृषि भूमि को एकीकृत करने में मदद मिलेगी और खेती करना आसान हो सकेगा। साथ ही सिंचाई, खेती के आधुनिक उपकरणों के उपयोग और उत्पादन बढ़ाने में भी लाभ मिलेगा।
आवेदन की प्रक्रिया
योजना का लाभ उठाने के लिए इच्छुक किसान/खाताधारक अपना आवेदन पत्र बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) अथवा सहायक कलेक्टर (परगनाधिकारी) को प्रस्तुत कर सकते हैं।
त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र
नीति के पारदर्शी संचालन, अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए राज्य स्तर पर एक उच्चाधिकार समिति (HPC), राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा जनपद स्तर पर क्रियान्वयन समिति का गठन किया गया है।
धामी कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले:-
-उत्तराखण्ड राजस्व परिषद, समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026 के संशोधन को मंत्रीमण्डल की मंजूरी।
राजस्व विभाग के अंतर्गत राजस्व परिषद समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा संशोधन नियमावली 2026 में संशोधन को मंत्रिमंडल की मंजूरी दी है। इसके तहत कंप्यूटर टाइपिंग जो कि एक अधिमानी अहर्ता रखी गई थी। जिसके तहत सिर्फ कंप्यूटर का ज्ञान होना आवश्यक था। अब इसे क्वांटिफाई करते हुए 8,000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा की टाइपिंग स्पीड होगी चाहिए। माइक्रोसोफ्ट ऑफिस का बेसिक ज्ञान , एवं विंडोज एंड इंटरनेट का भी ज्ञान होना जरूरी है।
– सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (कैप) का नाम बदलकर परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (परफ्यूमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट) रखे जाने की कैबिनेट ने प्रदान की मंजूरी।
– माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के निर्णय के क्रम में न्याय विभाग के अंतर्गत रजिस्ट्रार न्यायालय एवं केस प्रबंधक का पद सृजित किये जाने के लिये मंत्रीमंडल ने दी मंजूरी।
– चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, के अंतर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्मिकों की कमी को दूर किये जाने हेतु संविदा पर संकाय सदस्यों को 03 वर्ष के लिये रखे जाने के लिये अबतक विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री का अनुमोदन अनिवार्य होता था। उक्त नियमों में संशोधन करते हुए कार्मिकों का चयन सचिव स्तर पर किये जाने का मंत्रीमंडल द्वारा दिया गया अनुमोदन।
– चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का ढाचा पुर्नगठित किये जाने पर कैबिनेट की मंजूरी।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के ढांचे में पूर्व में 29 पद थे जिन्हें बढाते हुए 40 पद किये जाने का मंत्रीमंडल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का ढांचा पुर्नगठित करते हुए वित्त नियंत्रक का 01, कनिष्ठ अभियंता 01, प्रशासनिक अधिकारी 01, लेखाकार 01, वरिष्ठ सहायक 01, कनिष्ठ सहायक 01 इसके अतिक्ति 04 मल्टी परपज वर्कर, 01 वाहन चालक के पदों का सृजन किया गया है।
– राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में कार्यरत संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन एवं प्रबन्धन समिति आदि के माध्यम से कार्यरत कुल 277 कार्मिकों को समान कार्य-समान वेतन प्रदान किये जाने की कैबिनेट ने प्रदान की मंजूरी।
– चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत लैब टैक्नीशियन संवर्ग के ढाँचे को आई०पी०एच०एस० मानकानुसार पुनर्गठित किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय। आई०पी०एच०एस० मानकानुसार 03 पदसोपान के अंतर्गत मेडिकल लैब टैक्नोलॉजिस्ट के 266, टैक्निकल ऑफिसर के 54, एवं चीफ टैक्निकल ऑफिसर के 25 पदों, इस प्रकार कुल 345 पदों को मानकानुसार पुनर्गठित किये जाने की मंजूरी।
-महिला स्पोर्टस कॉलेज, लोहाघाट चम्पावत के सुचारू संचालन हेतु प्रधानाचार्य सहित कुल 16 पदों को सृजित करने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
– लघु जल विद्युत परियोजना विकास नीति, 2015 के कतिपय प्राविधानों में संशोधन किये जाने का मंत्रीमण्डल ने प्रदान किया अनुमोदन।
लघु जलविद्युत परियोजना विकास नीति 2015 में संशोधन करते हुए परफॉर्मेंस सिक्योरिटी को शून्य करने के प्रस्ताव पर मंजूरी। डेवलपर को फॉरेस्ट एनवायरनमेंट क्लीयरेंस मिल जाती है तो तब से वह कितने दिनों में कार्य शुरू करेगा। उसके लिए भी निश्चित समय सीमा तय की जायेगी।
– ऊर्जा विभाग के अंतर्गत तीनों निगमों में निदेशक की नियुक्ति से संबंधित नियमावली में संशोधन करते हुए निदेशक मंडल में नियुक्त शब्द से नियुक्त शब्द को हटाए जाने पर मंत्रीमण्डल द्वारा प्रदान की गई मंजूरी। इस संबंध में पूर्व में नियमावली बनी थी, उसमें यह समस्या उत्पन्न हो रही थी कि इसमें निदेशक के चयन के लिए पूर्व में व्यवस्था रखी गई थी कि निदेशक मंडल में नियुक्त मुख्य अभियंता, महाप्रबंधक और उससे उच्च स्तर के अधिकारी इसमें पात्र होते थे जिसमें से अब निदेशक मंडल में नियुक्त निदेशक मंडल में नियुक्त शब्द को हटाने के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल द्वारा सहमति दी गई है।
– उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम को प्रभावी रूप से क्रियान्वयन किये जाने हेतु उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियम-2026 प्रख्यापित किये जाने पर कैबिनेट ने दी मंजूरी। इस नियमावली के माध्यम से राज्य में अल्पसंख्यक मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिख समुदाय के शैक्षणिक विकास एवं नवीन संस्थानों की मान्यता, नवीनीकरण और मान्यता की समाप्ति इत्यादि प्रक्रिया को ऑनलाईन माध्यम से प्रबंधित करने का प्रावधान किया गया है।
– पंचायतीराज विभाग के अन्तर्गत पंचायत भवन विहीन ग्राम पंचायतों में राज्य सैक्टर के अन्तर्गत पंचायत भवन निर्माण हेतु वर्तमान में प्रचलित दर ₹ 10 लाख प्रति पंचायत घर को संशोधित करते हुए ₹ 20 लाख प्रति पंचायत घर निर्धारित किये जाने पर मंत्रीमण्डल का अनुमोदन।
-उत्तराखण्ड की पंचम विधान सभा के वर्ष 2026 का विशेष सत्र का तत्काल प्रभाव से सत्रावसान किये जाने का मंत्रीमण्डल द्वारा किया गया अनुमोदन।
– गृह विभाग के अंतर्गत विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग में कुल 15 पदों को सृजित करने का मंत्रीमण्डल ने दिया अनुमोदन। जिनमें 05 वैज्ञानिक अधिकारी, 05 ज्येष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी तथा 05 प्रयोगशाला सहायक होंगे।
– उत्तराखण्ड पर्यटन यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली में संशोधन पर कैबिनेट की मंजूरी। पूर्व में होमस्टे एवं ब्रेड एण्ड ब्रेकफास्ट के लिये अलग-अलग नियमावलियां थी। इन्हें संकलित करते हुए एक नियमावली प्रस्तावित की गई थी जिसे कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्रदान करते हुए होमस्टे के तहत कमरों की संख्या को 05 से बढाकर 08 किया गया है। रिन्यूअल की व्यवस्था को सरल बनाते हुए रिन्यूअल फीस को ऑनलाईन भुगतान किये जाने पर ऑटोमैटिक रिन्यूलअल माना जायेगा।
