- नीलकंठ धाम के शैक्षिक-साहसिक भ्रमण से बढ़ी छात्रों की जिज्ञासा, तीन दिवसीय गोष्ठी रही प्रेरणादायी
वाचस्पति रयाल @ नरेंद्रनगर। यहां स्थित धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय में ‘विजन फॉर विकसित भारत 2047’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन उत्साह और प्रेरणा के साथ हुआ। तीसरे दिन के द्वितीय सत्र में छात्र-छात्राओं को कार्यशाला के उद्देश्यों से अवगत कराते हुए राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्राण-प्रण से कार्य करने का आह्वान किया गया।
संगोष्ठी के तृतीय दिवस पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार प्रतिभागियों ने प्रथम सत्र में नीलकंठ महादेव मंदिर का आध्यात्मिक एवं साहसिक शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण में दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. रेणु कीर, दक्षिण अफ्रीका से शोध छात्रा मिसेल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोधार्थी बिस्वास एवं शाम्भावी सहित अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया।
नीलकंठ क्षेत्र की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं, प्राकृतिक झरनों और भगवान भोलेनाथ के पवित्र धाम के दर्शन कर प्रतिभागियों ने आध्यात्मिक, प्राकृतिक और साहसिक अनुभव का आनंद लिया। भ्रमण के दौरान भारतीय संस्कृति और प्रकृति के अद्भुत समन्वय को निकट से समझने का अवसर मिला।
भ्रमण के उपरांत महाविद्यालय परिसर में समापन सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि शैक्षिक भ्रमण के साथ साहसिक अनुभव विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सीखने की ललक को बढ़ाता है। इससे सामूहिक कार्य क्षमता, अनुशासन, भाईचारा और नेतृत्व कौशल का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी युवा सशक्तिकरण, महिला उत्थान, कृषि नवाचार और वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में समावेशी एवं सतत विकास पर सार्थक विमर्श का प्रभावी मंच साबित हुई। अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन छात्रों और शोधार्थियों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में संकल्प का सशक्त माध्यम बनकर संपन्न हुआ।
