- सरकारी दफ्तरों में गुंडागर्दी पर सख्ती, बिना अपॉइंटमेंट नहीं मिलेगी एंट्री
देहरादून@रा. वि.। उत्तराखंड सरकार ने शासकीय कार्यालयों में बढ़ती अप्रिय और हिंसक घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। अब सरकारी दफ्तरों में बिना पंजीकरण, बिना पहचान पत्र और बिना निर्धारित प्रक्रिया के प्रवेश संभव नहीं होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा तंत्र लागू किया गया है।
कर्मचारियों के लिए टैम्पर-प्रूफ पहचान पत्र पहनना अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत सभी स्थायी और संविदा कर्मचारियों के लिए टैम्पर-प्रूफ पहचान पत्र पहनना अनिवार्य होगा। कार्यालय परिसरों में आम जनता के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। केवल वीआईपी और दिव्यांगजन के वाहनों को सघन जांच के बाद ही अनुमति दी जाएगी। प्रवेश द्वारों पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD) लगाए जाएंगे तथा प्रत्येक आगंतुक की अनिवार्य फ्रिस्किंग होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व निर्धारित समय (अपॉइंटमेंट) के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकेगी। आगंतुकों को रिसेप्शन पर पंजीकरण कर वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) लागू किया जाएगा, जिसमें आगंतुक की फोटो, पहचान विवरण और आने का उद्देश्य दर्ज होगा। सत्यापन के बाद टाइम-स्टैम्प्ड क्यूआर/आरएफआईडी पास जारी किया जाएगा, जिससे आगंतुक केवल निर्धारित मीटिंग जोन तक ही जा सकेगा।
प्रतिनिधिमंडल की संख्या भी सीमित कर दी गई है। किसी अधिकारी के कक्ष में एक समय में अधिकतम दो व्यक्तियों को ही प्रवेश मिलेगा। दो से अधिक लोगों की बैठक कॉन्फ्रेंस रूम में होगी, जहां अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अधिकतम तीन लोगों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।
लोक सेवक के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या गाली-गलौज करना गंभीर दंडनीय अपराध
सरकार ने चेतावनी दी है कि किसी भी लोक सेवक के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या गाली-गलौज करना गंभीर दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS, 2023) की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और दोषी व्यक्ति को परिसर से बाहर कर दिया जाएगा।
सुरक्षा के तहत कार्यालयों में हाई क्वालिटी एचडी सीसीटीवी कैमरे (ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित) लगाए जाएंगे, जिनका कम से कम 90 दिनों का बैकअप सुरक्षित रखा जाएगा। अधिकारियों की डेस्क के नीचे और रिसेप्शन पर ‘साइलेंट पैनिक अलार्म’ भी स्थापित किए जाएंगे।
घटना होने की स्थिति में साक्ष्यों की सुरक्षा, तत्काल चिकित्सा सहायता, मेडिको-लीगल केस दर्ज कराने और दो माह के भीतर विवेचना पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षक स्तर का अधिकारी ही मामले की जांच करेगा।
सरकार ने यह भी निर्देशित किया है कि सभी कार्यालयों में आगंतुकों के लिए ‘डूज एंड डोंट्स’, दंडात्मक कार्रवाई की सूची और महत्वपूर्ण संपर्क विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। उच्च जोखिम वाले कार्यालयों का वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाएगा।
नई SOP को सरकारी कार्यस्थलों पर सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
