- मंत्री सुबोध उनियाल का नगरवासी जता रहे हैं आभार
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर।
टिहरी के राजा नरेंद्र शाह की राजधानी व जिला मुख्यालय का हेड क्वार्टर रहा ऐतिहासिक शहर नरेंद्रनगर में सीवर लाइन निर्माण की मांग वर्ष 1980-85 से निरंतर उठती चली आ रही थी। नरेंद्रनगर क्षेत्र को मंत्री सुबोध उनियाल ने अपनी कार्यस्थली उस वक्त चुन लिया था,जब वे इसी शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में अध्यनरत थे। उनकी इंटर तक की शिक्षा/दीक्षा इसी शहर में हुई थी।
यही वजह थी कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा ग्रहण करने और इंजीनियरिंग डिप्लोमा हासिल करने के बाद वे, नरेंद्रनगर को नहीं भूले और उन्होंने इलाहाबाद से यहां लौटकर नरेंद्रनगर/देवप्रयाग को अपनी कर्मस्थली चुन लिया। जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों का निराकरण तथा विकास कार्यों की भूख व बेजोड़ कार्य क्षमता जैसी पूंजी के दम पर वे वर्ष 2007 में नरेंद्रनगर से विधायक चुन लिए गए।
विधायक व मंत्री रहते हुए सुबोध उनियाल ने क्षेत्र में *सूर्य कुंड- रानीताल पेयजल पंपिंग योजना, नरेंद्रनगर में पीटीसी की स्थापना, तपोवन कुंजापुरी रोप वे सहित कई अन्य योजनाओं को धरातल पर उतरने का काम किया है।
श्री उनियाल द्वारा इन बड़ी योजनाओं को ना सिर्फ स्वीकृत करवाया गया है, बल्कि उन्हें धरातल पर भी उतारने का काम भी बखूबी किया जा रहा है।
इन्हीं बड़ी योजनाओं में शामिल है, नरेंद्र नगर शहर अंतर्गत 41 करोड़ 44 लाख की लागत से निर्माणाधीन शिविर लाइन निर्माण का कार्य की योजना।
बहुत पुराने समय से नगर में शिविर लाइन बिच्छाने की इस पुरानी मांग को पूरा करने का भरोसा मंत्री उनियाल ने नगर वासियों को दिया था।
वन मंत्री सुबोध उनियाल के प्रयासों से वर्ष 2025-26 में स्वीकृत हुई इस योजना पर नगर वासियों ने खुशी का इजहार करते हुए , मंत्री का आभार जताया है।

डामरीकरण न होने से उड़ती धूल बनी लोगों की परेशानी का सबब
बताते चलें कि नगर में सीवर लाइन बिछाने का काम वीवीआईपी कंपनी गाजियाबाद कर रही है। इस कंपनी के द्वारा तहसील तिराहे से लेकर कुमार खेड़ा के स्काईव्यू होटल तक 25 दिन पहले लाइन बिछा दी गई थी। मगर इस 500 मीटर क्षेत्र में जहां बस्ती है, अभी तक डामरीकरण नहीं किया गया है। जिसकी वजह से यहां रह रहे नागरिकों, दुकान दारों,पैदल व दुपहिया वाहनों पर चलने वालों को वाहनों के चलते उड़ती धूल के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कुमारखेड़ा बस्ती का हो रहा बुरा हाल
उड़ती धूल से सबसे बुरा हाल कुमार खेड़ा बस्ती का है। यहां सड़क के नजदीक के मकानों पर भी धूल की परतें जम गई हैं।
सड़क के डामरीकरण होने से जहां इस क्षेत्र में लोग धूल/धूसरित माहौल से गुजर रहे हैं, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बिछाई गई लाइन को भी मिट्टी डालकर समतल नहीं किया गया है। सड़क पर गड्ढे होने से दुपहिया वाहन हिचकोले खा रहे हैं।
उधर वी वीपीआईपी कंपनी गाजियाबाद के इंजीनियर का कहना है कि डामरीकरण का कार्य लोक निर्माण विभाग करेगा। मगर लोक निर्माण विभाग है कि जिसके कानों में अभी तक जूं तक नहीं रेंगी है।
नागरिकों का कहना है कि उबड़/खाबड़ हुई इस सड़क पर तुरंत डामरीकरण किया जाए, ताकि दुर्घटना की आशंका ना हो और धूल से लोग बच सकें।
