- सूखे पड़े स्टैंड पोस्ट और अधूरी योजनाओं ने खोली जल जीवन मिशन की पोल
- पश्चिमी भरदार की समस्याओं पर उक्रांद का प्रदर्शन
- कागजों में करोड़ों की योजनाएं, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण
- उक्रांद का मिला साथ, शासन प्रशासन के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण
दिलवर सिंह बिष्ट@ रुद्रप्रयाग। बारिश के मौसम में भी पेयजल के लिए तरसते ग्रामीणों की ये तस्वीर करोड़ों रुपये की लागत से बनी पेयजल योजनाओं की हकीकत बयां कर रही है। जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव लगाए गए स्टैंड पोस्ट कई जगह सूखे पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कहीं योजनाएं अधूरी हैं तो कहीं निर्माण के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में सरकार के पेयजल उपलब्ध कराने के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर आगे आया उक्रांद,डीएम से मिले
जखोली ब्लॉक के पश्चिमी भरदार क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के युवा केंद्रीय महामंत्री अर्जुन कंडारी, जिला महामंत्री अजीत भंडारी, जिला महामंत्री हरिभजन भंडारी, संरक्षक सूरत सिंह झिंकवान, जिला महामंत्री दीप प्रकाश भट्ट, युवा जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा और जिला प्रचार मंत्री प्रदीप सिंह बिष्ट ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समय रहते समाधान करने की मांग की।
कई किलोमीटर दूर से ढो रहे पीने का पानी
ज्ञापन में ग्राम पंचायत बांसी के ग्राम सौंदा निवासी पंचम सिंह रावत ने बताया कि सिरवानी, फरस्याड़ी, जीवालधार, पितरधार और ग्राम सौराखाल में जल जीवन मिशन तथा पंपिंग पेयजल योजनाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। बारिश के मौसम में भी ग्रामीणों को इन योजनाओं से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ रहा है। कई ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से ड्रमों के जरिए पीठ पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित गांवों में सुचारू पेयजल व्यवस्था तत्काल बहाल करने की मांग की।

पुल और सड़क निर्माण की भी उठी मांग
ग्रामीणों ने सेमलता-कफना मोटर मार्ग के डुंगरा में लंबे समय से प्रस्तावित पुल का निर्माण तत्काल कराने की मांग की। उनका कहना है कि पुल की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सड़क के अभाव में जंगल के रास्ते स्कूल जाते बच्चे
वहीं ग्राम पंचायत बांसी के जीवालधार, पितरधार और सिरवानी के ग्रामीणों के बच्चों को करीब चार किलोमीटर दूर जंगल के रास्ते सौराखाल स्कूल जाना पड़ता है। जंगल के रास्ते आवाजाही के दौरान जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों को भी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कर इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की।
इसके अलावा ग्राम पंचायत सतनी तक मोटर मार्ग पहुंच चुका है और आगे के तोकों के लिए भी मोटर मार्ग स्वीकृत बताया गया है, लेकिन सतनी से आगे वन विभाग की भूमि आने के कारण सड़क गांवों तक नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों ने वन भूमि से संबंधित प्रक्रिया पूरी कर सड़क निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग की।
सौराखाल सीएचसी को उच्चीकृत करने की मांग
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई। क्षेत्र के लोगों को गंभीर बीमारी की स्थिति में उपचार के लिए 45 से 50 किलोमीटर दूर रुद्रप्रयाग या श्रीनगर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने सौराखाल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत करने, अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराने और पर्याप्त डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की मांग की है।
उक्रांद ने दी धरने की चेतावनी
उक्रांद पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पश्चिमी भरदार क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो पार्टी ग्रामीणों के साथ सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगी।
उक्रांद नेताओं ने कहा कि सरकार एक ओर गांवों में पेयजल और यातायात व्यवस्था बेहतर होने के दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर ग्रामीण आज भी पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं की उपलब्धियां कागजों और प्रचार-प्रसार तक सीमित हैं, जबकि ग्रामीणों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
