- एक बार फिर गति पकड़ने लगा भारत-चीन सीमा व्यापार
नदीम परवेज@धारचूला। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के सीमांत धारचूला से ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारत-चीन सीमा व्यापार एक बार फिर गति पकड़ने लगा है। छह वर्ष के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुए व्यापार के तहत सोमवार को 17 व्यापारियों और सहायकों का दूसरा दल सामान सहित चीन के ताकलाकोट (पुरांग) के लिए रवाना हुआ।

भारत-चीन सीमा व्यापार का यह पारंपरिक मार्ग धारचूला से लिपुलेख दर्रे के रास्ते तिब्बत के ताकलाकोट स्थित पुरांग मंडी तक जाता है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह व्यापार बंद हो गया था, जिसे वर्ष 1992 में दोबारा शुरू किया गया। इसके बाद कोविड-19 महामारी के चलते वर्ष 2021 में व्यापार फिर स्थगित हो गया था। अब वर्ष 2026 में चीन के पुरांग प्रशासन से हरी झंडी मिलने के बाद व्यापार दोबारा बहाल हुआ है।
पहले पुराने पंजीकृत व्यापारियों को मिली अनुमति
व्यापार बहाली के शुरुआती चरण में उन पुराने पंजीकृत व्यापारियों को अनुमति दी गई, जिनका सामान पहले से ही पुरांग-ताकलाकोट की मंडियों में मौजूद था। हाल ही में नौ व्यापारियों और सहायकों समेत 17 सदस्यीय पहला दल लिपुलेख दर्रे के रास्ते ताकलाकोट के लिए रवाना हुआ था।
अब दूसरे दल के रवाना होने से सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में उत्साह और बढ़ गया है। प्रशासन के अनुसार व्यापारियों के साथ पहले से पुरांग में मौजूद सामान भी चीन पहुंचाया जा रहा है। वहीं चीन से कुछ सामान गुंजी कस्टम तक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
लाखों रुपये का सामान वर्षों से मंडी में फंसा
कोविड-19 के बाद व्यापार मार्ग बंद होने से धारचूला सहित व्यास, दारमा और चौदास घाटियों के स्थानीय व्यापारियों का लाखों रुपये का सामान पुरांग ताकलाकोट मंडी में फंस गया था। व्यापार मार्ग खुलने के बाद अब इन व्यापारियों को अपने पुराने माल को निकालने और दोबारा व्यापार शुरू करने की उम्मीद जगी है।

रंग समुदाय और सीमांत व्यापारियों में उत्साह
भारत-चीन तिब्बत व्यापार धारचूला के साथ-साथ व्यास, दारमा और चौदास घाटियों के लोगों तथा रंग समुदाय के लिए आर्थिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। व्यापार बंद होने से सीमांत क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा था।
इस बार पुराने अनुभवी व्यापारियों के साथ युवा और महिलाएं भी व्यापार में भागीदारी कर रही हैं। पूर्व वरिष्ठ व्यापारी दीवान सिंह गरब्याल, भारत-चीन व्यापार के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली और महासचिव दौलत सिंह राईपा सहित कई व्यापारी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
व्यापारिक वस्तुओं और नियमों पर भी कड़ी नजर
व्यापार दोबारा शुरू होने के बाद अब व्यापारियों की नजर व्यापारिक वस्तुओं, सीमा शुल्क, पंजीकरण, परमिट और दोनों देशों द्वारा निर्धारित नियमों पर है। लंबे अंतराल के बाद व्यापार शुरू होने के कारण शुरुआती चरण में प्रशासन और सीमा से जुड़े विभागों द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही व्यापार आगे बढ़ाया जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों को उम्मीद है कि यदि व्यापार इसी तरह चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ता रहा तो आने वाले समय में भारत-चीन सीमा व्यापार फिर से धारचूला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है।
छह साल से बंद पड़े व्यापार मार्ग के खुलने से सीमांत व्यापारियों के चेहरों पर अब राहत और उम्मीद दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में व्यापार का विस्तार कितना होता है और पुरांग मंडी से व्यापारिक गतिविधियां किस गति से सामान्य होती हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी।
17 व्यापारियों को आज सामान सहित भारत से चीन के लिए रवाना किया गया है। पहले गए व्यापारियों का कुछ सामान भी इस दल के साथ चीन भेजा गया है। साथ ही चीन से कुछ सामान गुंजी कस्टम तक पहुंच चुका है। इससे माना जा रहा है कि भारत-चीन सीमा व्यापार का रास्ता अब धीरे-धीरे पूरी तरह खुलने लगा है।
आशीष जोशी,एसडीएम धारचूला एवं ट्रेड अधिकारी
