Conspiracy accused in the 2019 attempt to shoot a farmer has surrendered before a local court and been sent to judicial custody following court directions
- सात साल पहले किसान हत्याकांड में षड्यंत्रकारी था आरोपी
Rashtriya vichar@रामनगर। सात वर्ष पूर्व एक कृषक की गोली मारकर हत्या का प्रयास करने के षड्यंत्रकारी आरोपी को न्यायालय के निर्देश पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर स्थानीय न्यायालय में आत्मसमर्पण किया गया था।

साल 2019 का है मामला: यह बहुचर्चित घटनाक्रम साल 2019 की गांधी जयंती के दिन का है, जब छोई स्थित बलवीर गार्डन में चूनाखान बैलपोखरा निवासी चंद्रशेखर टम्टा पुत्र केशोराम को अज्ञात लोगों ने हमला कर जान से मारने का प्रयास किया था। गंभीर रूप से घायल चंद्रशेखर के पुत्र हेमंत शेखर की तहरीर पर दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान गोली चलाने वाले शूटरों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली निवासी महेश टम्टा उर्फ महेश चंद्रा पुत्र शंकर लाल द्वारा हायर करने की बात सामने आई थी। जिसके आधार पर मुकदमें में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 बी की बढ़ोतरी कर महेश को षड्यंत्रकारी घोषित किया गया था।
आरोपी की गिरफ्तारी पर पुलिस ने घोषित किया था इनाम: आरोपी महेश द्वारा गिरफ्तारी से बचने का प्रयास करने पर पुलिस द्वारा उसके दिल्ली स्थित आवास पर कुर्की के साथ ही उसकी गिरफ्तारी पर पहले पच्चीस तथा बाद में पचास हजार का इनाम भी घोषित किया गया था। आरोपी को अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ नैनीताल उच्च न्यायालय से 29 सितम्बर 2023 को मिली अग्रिम जमानत जान बूझकर मुकदमा लटकाने के कारण रद्द कर दी गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम अदालत ने नही किया दखल: मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी हाई कोर्ट के निर्णय पर हस्तक्षेप न कर महेश टम्टा को ट्रायल न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिए थे। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में, हम उच्च न्यायालय द्वारा पारित जमानत रद्द करने के आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझते। फिर भी, हम याचिकाकर्ता को मुकदमे में सहयोग करने और विलंबकारी रणनीतियाँ नहीं अपनाने की अनुमति देते हैं तथा यदि न्यायालय याचिकाकर्ता की सद्भावना से मुकदमे को आगे बढ़ाने के संबंध में संतुष्ट हो जाता है, तो तीन माह की अवधि के बाद याचिकाकर्ता द्वारा पुनः प्रस्तुत की जाने वाली किसी भी जमानत अर्जी पर विचार करने के लिए विचारण न्यायालय को खुला रखा जाता है।
उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट में समर्पण को कहा: सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद आरोपी द्वारा स्थानीय न्यायालय में आत्मसमर्पण के बाद आरोपी महेश को न्यायालय द्वारा स्वास्थ्य कारणों पर मिली जमानत के विरुद्ध वादी द्वारा पुनः उच्च न्यायालय में गुहार लगाई। जहां कोर्ट ने आरोपी की नियमित जमानत रद्द करते हुए आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष समर्पण करने के निर्देश दिए।
आत्मसमर्पण कर जमानत के लिए फिर लगाई अर्जी, कोर्ट ने की खारिज: इस निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय से भी राहत न मिलने के कारण आरोपी महेश टम्टा द्वारा मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर जमानत के लिए याचिका दाखिल की। जिसे ट्रायल कोर्ट द्वारा अस्वीकार कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में हल्द्वानी स्थित उप कारागार भेजने के निर्देश दे दिए। न्यायालय के निर्देश पर पुलिस द्वारा आरोपी का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कार्यवाही की गई।
