- रेलवे टनल की ब्लास्टिंग बनी ग्रामीणों की मुसीबत
- डीएम के आदेश के बाद भी नहीं मिला मुआवजा
- ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
वाचस्पति रयाल @नरेंद्रनगर। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के निर्माण के लिए की जा रही हैवी ब्लास्टिंग ने नरेंद्रनगर विकासखंड की पट्टी दोगी के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टनल निर्माण के दौरान किए जा रहे विस्फोटों से कई गांवों में मकानों की नींव और दीवारों में दरारें आने से करीब 87 परिवार दहशत और बेचैनी के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की जांच में करोड़ों रुपये के नुकसान की पुष्टि होने के बावजूद रेलवे विकास निगम अब तक प्रभावित परिवारों की सुध नहीं ले रहा है।
पट्टी दोगी क्षेत्र की लोयल ग्राम पंचायत के कुंड्या काटल, लोड़सी ग्राम सभा के बिलोगी और चमेली ग्राम पंचायत के गूलर गांव में रेलवे टनल निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंचा है। कई मकानों में दरारें आने के साथ ही उनकी संरचना प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण उन्हें हर समय मकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
जांच में सामने आया 10 करोड़ से अधिक का नुकसान
जिलाधिकारी टिहरी नीतिका खंडेलवाल की ओर से मुख्य परियोजना प्रबंधक रेलवे को भेजे गए पत्र के अनुसार, प्रशासन की जांच टीम ने प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन किया है।
इन गांवों के नुकसान का आंकलन
- कुंड्या काटल: 28 परिवारों के नुकसान का आकलन 2,98,91,550 रुपये।
- बिलोगी: 54 परिवारों के नुकसान का आकलन 6,31,62,317 रुपये।
- गूलर:पांच परिवारों के नुकसान का आकलन 72,15,563 रुपये।
इस तरह कुल 87 परिवारों के नुकसान का आकलन 10 करोड़ 2 लाख 69 हजार 430 रुपये किया गया है।
जिलाधिकारी ने 20 जनवरी 2026 को मुख्य परियोजना प्रबंधक रेलवे को आदेश जारी करते हुए प्रभावित ग्रामीणों के मकानों की मरम्मत और निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए थे।
सात माह बाद भी नहीं मिली राहत
ग्रामीणों का आरोप है कि जिलाधिकारी के आदेश को करीब सात माह बीत चुके हैं, लेकिन रेलवे विकास निगम की ओर से न तो क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत कराई गई और न ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होना विभाग की गंभीर लापरवाही और हठधर्मिता को दर्शाता है।
ग्रामीणों ने बैठक में कहा कि यदि प्रशासन की जांच में नुकसान का स्पष्ट आकलन हो चुका है और जिलाधिकारी की ओर से भुगतान व मरम्मत के निर्देश भी दिए जा चुके हैं, तो फिर प्रभावित परिवारों को अब तक राहत क्यों नहीं दी गई? उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक प्रशासनिक आदेश का महीनों बाद भी पालन नहीं हो रहा है तो आम गरीब ग्रामीण अपनी समस्या लेकर किसके पास जाए?
रेलवे विकास निगम के खिलाफ आंदोलन का ऐलान
बैठक में ग्रामीणों ने रेलवे विकास निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए और प्रभावित परिवारों की अनदेखी का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर होने वाले निर्माण कार्य से यदि उनके घरों को नुकसान पहुंच रहा है तो उनकी सुरक्षा और क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से रेलवे विकास निगम के खिलाफ संयुक्त आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया। उनका कहना है कि यदि जल्द ही क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और निर्धारित मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से भी मामले में हस्तक्षेप कर जिलाधिकारी के आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवार लंबे समय से भय और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और राहत चाहिए।
बैठक में लोड़सी के ग्राम प्रधान बृजेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता वासुदेव, सत्ये सिंह चौहान, विमला, मदन, राकेश, पंकज, धनवीर, विनोद प्रसाद, मनोज, कीर्ति राम, राजेंद्र प्रसाद, राधेलाल, कमलदीप, कविता देवी और शाकंभरी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
