Daughter-in-Law Carries Mother-in-Law in Kanwar, Fulfills Her Dream of Ganga Snan from Haridwar to Hapur
- श्रवण कुमार की मिसाल बनी बहू
- कंधों पर सास का सपना, सेवा और संस्कार की अनूठी कांवड़ यात्रा
हरिद्वार@Rashtriy Vichar। श्रावण कांवड़ मेले की औपचारिक शुरुआत में अभी समय है, लेकिन हरिद्वार से हापुड़ तक निकल रही एक अनोखी कांवड़ यात्रा हर किसी का दिल जीत रही है। यह यात्रा आस्था के साथ-साथ सेवा, समर्पण और पारिवारिक संस्कारों का ऐसा उदाहरण बन गई है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं।
हापुड़ निवासी वृद्धा ऊषा देवी की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि वह हरिद्वार में गंगा स्नान करें और कांवड़ यात्रा का पुण्य प्राप्त करें। बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण उनके लिए पैदल यात्रा संभव नहीं थी। ऐसे में उनकी बहू पिंकी ने अपनी बेटी राधा के साथ मिलकर सास की इस इच्छा को अपना संकल्प बना लिया।
बेटी राधा भी कर रही कदमताल: पिंकी पहले सास को हरिद्वार लेकर पहुंचीं, जहां हरकी पैड़ी पर उन्हें विधिवत गंगा स्नान कराया। इसके बाद विशेष रूप से तैयार की गई कांवड़ में ऊषा देवी को बैठाकर हरिद्वार से हापुड़ तक की पैदल यात्रा शुरू की। पूरी यात्रा के दौरान पिंकी कांवड़ को कंधों का सहारा देकर आगे बढ़ रही हैं, जबकि उनकी बेटी राधा भी हर कदम पर मां का साथ निभाते हुए दादी की सेवा में जुटी है।
बुजुर्ग की सेवा करना धर्म: पिंकी का कहना है कि सास की सेवा करना उनके लिए केवल पारिवारिक दायित्व नहीं, बल्कि ईश्वर का दिया सौभाग्य है। उनका मानना है कि जिस तरह माता-पिता जीवनभर बच्चों के लिए त्याग करते हैं, उसी तरह बुजुर्गों की सेवा करना हर संतान और परिवार का धर्म है।
श्रद्वालु हो रहे भावुक: इस अनूठी कांवड़ यात्रा को देखकर राहगीर और श्रद्धालु भावुक हो रहे हैं। लोग पिंकी और राधा का उत्साहवर्धन कर रहे हैं, उनके साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और इस सेवा भाव की खुले दिल से सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यह यात्रा केवल कांवड़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान की जीवंत मिसाल है, जो समाज को सेवा और संस्कार का प्रेरक संदेश दे रही है।
