- भुगतान के नये दोर में पुरानी आदतें बरकरार
- ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़े, फिर भी कैश कायम
नई दिल्ली। देश में डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ने के बावजूद नकदी का प्रचलन अब भी मजबूत बना हुआ है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ताजा शोध रिपोर्ट में सामने आया है कि यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बीच भी लोगों की नकदी रखने और उपयोग करने की आदत में उल्लेखनीय कमी नहीं आई है।
रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल ट्रांजैक्शन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन अर्थव्यवस्था में प्रचलित मुद्रा (करेंसी इन सर्कुलेशन) भी लगातार बढ़ रही है। इससे स्पष्ट होता है कि देश में डिजिटल और नकदी—दोनों समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे लेनदेन और आपात जरूरतों के लिए नकदी अभी भी भरोसेमंद माध्यम बनी हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट भारत की बदलती लेकिन संतुलित भुगतान आदतों की तस्वीर पेश करती है।
डिजिटल भुगतान प्रणाली जैसे Unified Payments Interface (UPI) के तेजी से विस्तार के बावजूद भारत में नकदी का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, नकदी की कुल मात्रा (करेंसी इन सर्कुलेशन) में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि अर्थव्यवस्था में इसकी सापेक्ष अहमियत धीरे-धीरे कम हो रही है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
• करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) में तेज़ उछाल:
जनवरी 2026 में चलन में मौजूद कुल नकदी 11.1% बढ़कर ₹40 लाख करोड़ हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में वृद्धि 5.3% थी।
• वित्त वर्ष के दौरान तेज़ बढ़ोतरी:
अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच CiC में ₹2.76 लाख करोड़ की वृद्धि हुई — जो पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई ₹88,817 करोड़ की वृद्धि से तीन गुना से अधिक है।
• जनता के पास मौजूद नकदी (CWP):
कुल CiC का लगभग 97.6% हिस्सा CWP है, जो बढ़कर ₹39 लाख करोड़ हो गया। इसमें 11.5% सालाना वृद्धि दर्ज की गई। यदि यही रुझान जारी रहा तो FY26 में वृद्धि FY21 (पोस्ट-पैंडेमिक) के ₹4.6 लाख करोड़ के स्तर को पार कर सकती है।
नकदी बढ़ने के प्रमुख कारण:
• एटीएम से अधिक निकासी और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी रखने की बढ़ती प्रवृत्ति।
• सोना और चांदी की कीमतों में वृद्धि, जिससे कई परिवारों ने अपनी होल्डिंग बेचकर नकदी प्राप्त की।
• जीएसटी में सुधार और आयकर स्लैब में बदलाव के कारण घरेलू उपभोग में बढ़ोतरी।
फिर भी डिजिटल भुगतान बढ़ रहा है
SBI के मनी डिमांड मॉडल के अनुसार, जीडीपी वृद्धि का प्रभाव सकारात्मक तो है लेकिन सांख्यिकीय रूप से बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। वहीं UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का प्रभाव नकारात्मक पाया गया है, जो संकेत देता है कि डिजिटल भुगतान धीरे-धीरे नकदी का विकल्प बन रहा है।
फिर भी, भरोसा, आदत, डिजिटल साक्षरता की कमी और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याओं के कारण बड़ी आबादी अब भी नकदी को प्राथमिकता देती है।
