NEET Row: Dharmendra Pradhan Resigns Amid Protests, Opposition Calls It a Victory of Public Pressure
नई दिल्ली@Rashtriy vichar। नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले दस दिनों से जारी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, विपक्ष के लगातार हमलों और देश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।
अपने पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में बनी स्थिति का राष्ट्रविरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे, इसी सोच के साथ उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने छात्रों से पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने की अपील भी की।
प्रधान ने कहा कि देश की युवाशक्ति ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और उन्हें किसी भी तरह के भ्रम या भटकाव का शिकार नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए यह मामला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि छात्रों और देश के हित का है। उन्होंने दोहराया कि 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं से उन्होंने कभी इनकार नहीं किया और पहले दिन से ही इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई का समर्थन किया।
- विपक्ष ने कहा—जनदबाव की जीत
इधर, विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के आंदोलन और जनदबाव की बड़ी जीत बताया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लगातार विरोध-प्रदर्शन, संसद और सड़क पर उठाए गए सवालों तथा छात्रों की आवाज के चलते सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। विपक्ष ने मांग की है कि केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं।
