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- यात्रियों और स्थानीयों को सता रहा मानसून खतरा
- गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा और वन-वे सिस्टम से जुड़ा मार्ग
उत्तरकाशी। वर्ष 2021 की आपदा में मांडो-तेखला बाईपास और साड़ा के समीप बह गए पुलों का निर्माण अब तक अधूरा है। मांडो में जर्जर बैली ब्रिज के सहारे वाहन आवाजाही कर रहे हैं, जबकि दोनों पुल गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा और वन-वे सिस्टम के मुख्य मार्गों से जुड़े हैं।
आपदा के दौरान मांडो-तेखला बाईपास का पुल बह जाने से आवाजाही कई दिन ठप रही, वहीं साड़ा के समीप पुल बहने के कारण बाड़ागड्डी और धौंतरी क्षेत्र का मुख्यालय से संपर्क कट गया। लोनिवि ने साड़ा में 20 मीटर लंबे बैली ब्रिज से आवागमन शुरू कराया और मांडो में गदेरे के बीच से सड़क बनाकर मार्ग खोला, लेकिन पांच साल बाद भी स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो पाया।
स्थानीय निवासी इंद्रेश उनियाल ने बताया कि मानसून में गदेरे में पानी आने के कारण आवाजाही में खतरा बना रहता है और कई बार मार्ग बंद हो जाता है। यह मार्ग चारधाम यात्रा के दौरान मुख्य मार्गों में शामिल होने के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए जोखिम भरा बन गया है।
लोनिवि के एई स्वरोज चौहान ने आश्वासन दिया कि मांडो पुल की डीपीआर एक सप्ताह में शासन को भेजी जाएगी और निर्माण प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। अधिकारियों की ढिलाई के कारण चारधाम यात्रा के मुख्य मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवागमन अब भी सवालों के घेरे में है।
उत्तरकाशी में चारधाम मार्ग पर पुल निर्माण में घोर लापरवाही,
पुल निमार्ण नही होने से स्थानीय और यात्रियों को जर्जर बैली ब्रिज के सहारे आवाजाही करनी पड़ रही है, लेकिन यह मार्ग गंगोत्री-केदारनाथ यात्रा और वन-वे सिस्टम से जुड़ा होने के बावजूद शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण जोखिम भरा बना हुआ है।
स्थानीय लोग और यात्री मानसून में गदेरे में बढ़ते पानी के कारण आवाजाही में खतरों का सामना कर रहे हैं। लेकिन पांच साल बाद भी चारधाम यात्रा के मुख्य मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हैं।
