UNESCO South Asia Round Table Held at Amrita Vishwa Vidyapeetham in Kerala
- यूनेस्को राउंड टेबल में दक्षिण एशिया के विशेषज्ञों ने वैश्विक मुद्दों पर की चर्चा
- भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका और यूनेस्को चेयरधारकों, शिक्षाविदों सहित 22 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया
- यूनेस्को चेयर्स हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक : टिम कर्टिस
केरल@ Rashtriy Vichar। यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस ने अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दो दिवसीय राउंड टेबल में कहा कि यूनेस्को चेयर्स संगठन के वैश्विक नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और यह नीति-स्तरीय चर्चाओं को गहराई से प्रभावित करती हैं।
इस कार्यक्रम में भारत, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से 22 से अधिक प्रतिनिधियों, यूनेस्को चेयरधारकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शोध और सामुदायिक पहलों को यूनेस्को की 2026–2027 की प्राथमिकताओं से जोड़ना रहा।
बैठक में “ट्रिपल प्लैनेटरी क्राइसिस” जैसे जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी और प्रदूषण के साथ-साथ डिजिटल परिवर्तन, नैतिक एआई, लैंगिक समानता और युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में बांग्लादेश के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि सुसान वाइज और नेपाल के लिए यूनेस्को प्रतिनिधि जैको डु टॉइट भी शामिल हुए। हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कुलाधिपति माता अमृतानंदमयी देवी से भी मुलाकात की।
अमृता विश्व विद्यापीठम भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है जहां तीन यूनेस्को चेयर्स स्थापित हैं—जेंडर इक्वैलिटी एंड वीमेन एम्पावरमेंट, एक्सपीरिएंशियल लर्निंग फॉर सस्टेनेबल इनोवेशन एंड डेवलपमेंट तथा असिस्टिव टेक्नोलॉजीज़ इन एजुकेशन।
यूनेस्को राउंड टेबल में भारत का बढ़ता शैक्षणिक प्रभाव
केरल स्थित अमृता विश्व विद्यापीठम में आयोजित दो दिवसीय यूनेस्को राउंड टेबल में दक्षिण एशिया के 4 देशों के 22 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यूनेस्को साउथ एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस ने कहा कि यूनेस्को चेयर्स वैश्विक नीति निर्माण और शोध को नई दिशा दे रहे हैं।
कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, नैतिक एआई, डिजिटल परिवर्तन और लैंगिक समानता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
