महाविद्यालय नरेंद्रनगर में विश्व रेड क्रॉस दिवस पर मानवता में एक जुटता विषय पर गोष्ठी आयोजित
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर। विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर यहां स्थित धर्मानन्द उनियाल राजकीय महाविद्यालय में रेड क्रॉस के संस्थापक सर हेनरी ड्यूनेट के जन्म दिवस को जहां हर्षोल्लास से मनाया गया, वहीं इस मौके पर इस वर्ष की थीम मानवता में एक जुटता विषय पर वक्ताओं ने रेड क्रॉस के मानवतावादी कार्यों का उल्लेख करते हुए,अपने विचारों से सभी को प्रभावित किया।
गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए रेड क्रॉस के प्रभारी डॉ० संजय महर ने रेडक्रॉस का इतिहास, स्थापना, उद्देशयों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समूचे विश्व भर में रेडक्रॉस सोसाइटी के माध्यम से बगैर भेदभाव,धर्म, जाति, संप्रदाय की परिकल्पना से दूर , रेड क्रॉस कैसे मानवता की सेवा में समर्पित रहता है।
प्राचार्य प्रो0 प्रणीता नन्द ने अपने सार गर्वित संबोधन में कहा कि रेड क्रॉस बगैर भेदभाव के मानवता की सेवा में समर्पित रहता है।
उन्होंने रूस-यूक्रेन सहित विभिन्न देशों की लड़ाई में घायल जवानों अथवा व्यक्तियों के जीवन रक्षा मे कटिबद्ध, रेड क्रॉस का मानवतावादी दृष्टिकोण बताया।
बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, रेड क्रॉस ने बड़े पैमाने पर युद्धोत्तर राहत कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया, लाखों विस्थापित नागरिकों की सहायता की, परिवारों को पुनर्मिलित कराया और लापता व्यक्तियों का पता लगाया।
पहला विश्व रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट दिवस 1948 में स्थापित कर, राष्ट्रीय स्तर पर रक्तदान, आपदा प्रबन्धन आदि कार्यक्रम प्रारंभ किए गये।
डाॅ० प्रणीता ने कहा कि सार्वभौमिक दृष्टिकोण के साथ मानवता के कार्याें में छात्र-छात्राओं को आगे आना चाहिए।
हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डाॅ० जितेन्द्र नौटियाल ने इटली में 1862 की घटना की याद ताजा करते हुए कहा कि इस युद्ध में मारे गये 40 हजार से अधिक घायल सैनिकों को बिना किसी चिकित्सा सुविधाओं के हताहत होते देख,वे इस हृदय विदारक घटना से दुखी व द्रवित हो उठे।
उन्होंने युद्ध काल में घायल सैनिकों की देखभाल के लिए राहत समितियों के गठन की सिफारिश की व घायलोें के राहत के लिए अंतर्राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया।
इसी समिति को बाद में अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के नाम से जाना गया।
शांति, सद्भाव, जीवन रक्षा व निस्वार्थ मानवीय कार्यों के लिए 8 मई, 1828 को जन्मे हेनरी डुनेंट को 1901 में पहला नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था।
इस अवसर पर डाॅ० सोनी, डाॅ० सुधा रानी, रंजीता, रेडक्रॉस सह प्रभारी लक्ष्मी कठैत, अजय, शिशुपाल, सोनिया, भूपेन्द्र, आयुषी, कल्पना, निशा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्रायें मौजूद थे।
