- साढ़े तीन किमी लंबी सुरंग में 1.5 किमी हिस्सा बना मौत का गलियारा,
- पांच फीट तक भरा पानी और मलबा; सात शव बरामद, तीन अब भी लापता
देहरादून/चमोली@Rashtriy Vichar#। पीपलकोटी की साढ़े तीन किलोमीटर लंबी सुरंग में हुआ हादसा सिर्फ पहाड़ के भीतर अचानक आए सैलाब की कहानी नहीं, बल्कि निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सुरंग में पिछले कुछ दिनों से पानी का रिसाव हो रहा था। गुरुवार शाम करीब छह बजे हालात अचानक बिगड़े और पानी व मलबे के तेज बहाव ने सुरंग के भीतर काम कर रहे श्रमिकों को अपनी चपेट में ले लिया।
रेस्क्यू टीमों ने करीब 22 घंटे तक चले अभियान में अब तक सात शव बरामद किए हैं, जबकि तीन श्रमिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सुरंग के भीतर करीब पांच फीट तक पानी और मलबा भर गया था। बचाव दल ने राफ्ट की मदद से शवों को बाहर निकाला। अंधेरा, पानी, मलबा और सुरंग की सीमित जगह ने राहत एवं बचाव अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।
1.5 किलोमीटर हिस्सा बना मौत का गलियारा
सुरंग के भीतर करीब 1.5 किलोमीटर का हिस्सा हादसे के बाद जिंदगी और मौत के बीच जंग का मैदान बन गया। तेज बहाव के साथ आए पानी और मलबे ने रास्ते बंद कर दिए। राहत दलों को मलबा हटाने और सुरंग के भीतर पहुंचने के लिए बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
अभियान में 222 जवानों ने मोर्चा संभाला। इनमें एनडीआरएफ के 105 जवानों के साथ आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें भी शामिल रहीं। लगातार कई घंटे चले अभियान के बावजूद तीन श्रमिकों का अब तक पता नहीं चल सका है।
तीन धमाके, तेज हवा और अचानक आया सैलाब
जिला अस्पताल में भर्ती छत्तीसगढ़ के श्रमिक हाबिल और भिंगरा ने हादसे के दौरान की भयावह स्थिति सुनाई। उनके मुताबिक सुरंग के भीतर तीन बार धमाके जैसी आवाजें सुनाई दीं और तेज हवा के साथ हालात अचानक बदल गए। देखते ही देखते पानी और मलबे का सैलाब सुरंग में घुस आया। दोनों श्रमिकों के लिए यह अनुभव जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसा रहा।
रिसाव पहले से था तो निगरानी कहां थी?
इस हादसे का सबसे बड़ा सवाल सुरंग में हो रहे पानी के रिसाव को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि हादसे से पहले भी सुरंग में पानी का रिसाव हो रहा था। ऐसे में यह जांच का अहम बिंदु होगा कि रिसाव की जानकारी होने के बावजूद निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
सवाल यह भी है कि क्या सुरंग में पानी के बढ़ते दबाव और संभावित खतरे का समय रहते आकलन किया गया था? क्या श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए पर्याप्त चेतावनी और आपात व्यवस्था मौजूद थी? मजिस्ट्रियल जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाने की उम्मीद है।
सुरंग के भीतर पहुंचे सीएम धामी
मुख्यमंत्री धामी ने घटनास्थल पर पहुंचकर सुरंग के भीतर बचाव अभियान का जायजा लिया और राहत एवं बचाव कार्य में आ रही चुनौतियों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना।

सरकार ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देने के साथ मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। हादसे में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब के श्रमिकों की मौत हुई है।

आपदा प्रबंधन मंत्री कौशिक ने भी राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को संवेदनशील स्थलों पर लगातार निगरानी रखने और पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए।
पीपलकोटी हादसा अब सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं रह गया है। सात मौतों और तीन लापता श्रमिकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह हादसा केवल पहाड़ के भीतर अचानक आए पानी और मलबे का कहर था, या पहले से दिख रहे खतरे की अनदेखी ने इसे और भयावह बना दिया? मजिस्ट्रियल जांच में इसी सवाल का जवाब सबसे अहम होगा।
