- 10 मार्च तक समाधान नहीं तो सड़कों पर उतरेंगे पेंशनर्स
- स्वास्थ्य प्राधिकरण के खिलाफ धरना-प्रदर्शन का ऐलान
वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर। वर्षों से लंबित पड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होने और मांगों को लगातार टालने से नाराज सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 10 मार्च तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 17 मार्च को देहरादून स्थित राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रांगण में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
यह निर्णय देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित संगठन कार्यालय में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कृषाली के नेतृत्व में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, आईटी पार्क देहरादून को पांच सूत्रीय मांग पत्र भेजते हुए समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कृषाली और प्रदेश प्रवक्ता जबर सिंह पंवार ने बताया कि पेंशनरों की प्रमुख समस्याओं में गोल्डन कार्ड की खामियों को दूर करना, चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान निर्धारित समय सीमा में करना, असाध्य रोगों से पीड़ित पेंशनरों को चिन्हित अस्पतालों में भर्ती कर बेड उपलब्ध कराना, गोल्डन कार्ड अंशदान कटौती बढ़ाने के आदेश को निरस्त करना तथा चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों की भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण और प्रशासन पेंशनरों की न्यायोचित मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। स्थिति यह है कि बीमार पेंशनरों को अस्पतालों में बेड खाली न होने का हवाला देकर भर्ती नहीं किया जाता, जबकि चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भुगतान महीनों से लंबित पड़ा है। कई मामलों में सात महीने से लेकर एक वर्ष पहले जमा किए गए बिलों का भी भुगतान नहीं किया गया है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि कई बार त्रिपक्षीय वार्ताओं के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होना बुजुर्ग पेंशनरों के साथ अन्याय और उनका अपमान है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता का अभाव बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
संगठन ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य प्राधिकरण से मांग की है कि पेंशनरों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 10 मार्च तक सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 17 मार्च को राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रांगण में प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्राधिकरण की होगी।
