Nepal Ordinance Removes 1,200 Officials, Sparks Press Freedom Concerns
- नेपाल में बड़े पैमाने पर अधिकारियों की बर्खास्तगी, प्रेस स्वतंत्रता पर उठे सवाल
- अध्यादेश से 1200 से अधिक पद खाली, प्रशासन और मीडिया संस्थानों में अनिश्चितता
काठमांडू। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां दुनिया भर में स्वतंत्र पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की आजादी पर जोर दिया जा रहा है, वहीं नेपाल में सरकार के एक बड़े फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। नेपाल सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर 26 मार्च 2026 से पहले नियुक्त 1200 से अधिक अधिकारियों को एक साथ पद से हटा दिया है।
यह अध्यादेश राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा जारी किया गया, जिसके तहत सरकारी संस्थानों में पहले से कार्यरत सभी सार्वजनिक पदाधिकारियों की नियुक्तियां स्वतः समाप्त मानी जाएंगी। इस फैसले का असर प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, नियामक संस्थाओं और मीडिया संगठनों तक पड़ा है।
इस निर्णय के तहत नेपाल विद्युत प्राधिकरण, नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण, नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण, नेपाल पर्यटन बोर्ड और कई अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों के प्रमुख अधिकारियों को हटाया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय समाचार समिति (आरएसएस), प्रेस काउंसिल नेपाल और अन्य मीडिया संस्थानों में भी शीर्ष पद खाली हो गए हैं।
राष्ट्रीय समाचार समिति, जो देश में सरकारी सूचना और समाचार का मुख्य स्रोत है, उसमें अचानक हुए बदलाव से प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि नए पदों पर नियुक्तियां राजनीतिक आधार पर की जा सकती हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक सुधार और पुराने प्रभावों को खत्म करने के लिए उठाया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों को हटाने से कामकाज प्रभावित हो सकता है और नई नियुक्तियों में समय लग सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही, तो इससे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि सरकार इन खाली पदों को कब और कैसे भरेगी, जिससे प्रशासनिक कामकाज और सेवा वितरण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
