तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन ने मचाई भारी तबाही, बेत्रावती बाजार और तिमुरे कस्बा पूरी तरह बहा; करीब 300 भारतीयों के लापता होने की खबर। पानी के सैलाब में उजड़ गए बाजार और बस्तियां, अपनों की तलाश में भटक रहे हजारों परिवार…
नदीप परवेज@धारचूला/काठमांडू। नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने सीमाई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 332 पहुंच गई है, जबकि 900 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ने से मृतकों का आंकड़ा भी बढ़ने की आशंका है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश में जुटे हैं।
बेत्रावती बाजार और तिमुरे कस्बा पूरी तरह तबाह : बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बेत्रावती बाजार और तिमुरे कस्बा पूरी तरह तबाह हो गए। तेज बहाव अपने साथ मकान, दुकानें, सड़कें और पुल तक बहा ले गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक बेत्रावती बाजार में करीब एक हजार की आबादी रहती थी। अचानक आई बाढ़ के बीच जिन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर भागने का मौका मिला, वे बच गए, लेकिन बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।
तिमुरे मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव : तिब्बत सीमा से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित तिमुरे मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव था। यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री परमिट एवं यात्रा संबंधी औपचारिकताओं के लिए ठहरते थे। ऐसे में लापता लोगों में विदेशी नागरिकों की संख्या भी काफी बताई जा रही है।
लापता में भारत और विदेशी नागरिक भी: नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता विदेशी नागरिकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक शामिल हैं। इनमें करीब 300 भारतीयों के लापता होने की सूचना है, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
सड़क और पुलों के बहने से बढ़ी चुनौती: बाढ़ ने बेत्रावती से रसुवागढ़ी सीमा चौकी तक जाने वाली सड़क के करीब 42 किलोमीटर हिस्से को बहा दिया है। इस मार्ग पर बने कई पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर ध्वस्त हो गए हैं। सड़क और पुलों के बह जाने से प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
सदमे में पूरा देश: नेपाल में आई इस आपदा ने हजारों परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। अपनों की तलाश में परिजन उम्मीद और भय के बीच राहत एवं बचाव दल की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। सीमाई क्षेत्रों में तबाही के निशान और लापता लोगों की बढ़ती संख्या ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।
