A one-day seminar on Indian knowledge tradition and cultural roots was held at Shaheed Belmati Chauhan Government College, Pokhari, highlighting the relevance of ancient Indian knowledge and values today.
- पोखरी महाविद्यालय में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
- नई पीढ़ी तक प्राचीन ज्ञान और संस्कार पहुंचाने का लिया संकल्प
वाचस्पति रयाल@ नरेन्द्रनगर। पट्टी क्वीली के पोखरी स्थित शहीद बेलमती चौहान राजकीय महाविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक जड़ें’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की आधुनिक समय में प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजक एवं संस्कृत विभाग प्रभारी डॉ. गणेश भागवत ने भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन, चिंतन और वैश्विक समस्याओं के समाधान की एक जीवंत एवं वैज्ञानिक प्रणाली है। उन्होंने कहा कि वैदिक साहित्य से लेकर प्राचीन ज्ञान-विज्ञान तक भारतीय सांस्कृतिक जड़ें अत्यंत समृद्ध, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी रही हैं।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शशि बाला वर्मा ने कहा कि शिक्षा में सांस्कृतिक जड़ों और प्राचीन ज्ञान पद्धतियों का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. दिनेश प्रताप सिंह ने भारतीय दर्शन, जीवन मूल्यों और प्राचीन ज्ञान प्रणाली की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित मानवीय मूल्यों और जीवन-दृष्टि को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
संगोष्ठी में डॉ. नीमा भेतवाल, डॉ. मुकेश सेमवाल, डॉ. बन्दना सेमवाल तथा योगाचार्य अजय तिवारी ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों रेखा नेगी, अंकित कुमार, नरेश सिंह, सुनीता देवी, दीवान सिंह, मूर्ति लाल सहित छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
संगोष्ठी के समापन पर भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों को सहेजने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
