No Road Access in Munsyari’s Dheelam Village Forces Locals to Carry Elderly Woman on Doli for 5 Km
- 5 किमी डोली यात्रा: मुनस्यारी के ढीलम गांव में सड़क के इंतजार की दर्दनाक तस्वीर
- गांव में सड़क न होने से सिस्टम पर सवाल
नदीम परवेज@Munsyari#apithoragarh#। मुनस्यारी क्षेत्र के ढीलम गांव से एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत सामने आई है, जिसने ग्रामीण विकास और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव की करीब 60 वर्षीय लीला देवी अचानक चक्कर खाकर गिर पड़ीं। हालत बिगड़ने पर परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की थी, क्योंकि गांव तक आज भी सड़क नहीं पहुंची है।
मजबूरी में ग्रामीणों को मानवता का सहारा लेना पड़ा और लीला देवी को डोली में लिटाकर लगभग 5 किलोमीटर दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पैदल फाफा गांव तक ले जाया गया। वहां पहुंचने के बाद ही उन्हें प्राथमिक उपचार मिल सका। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
यह घटना केवल एक मरीज की आपात स्थिति नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली और विकास दावों पर बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन आज भी गांव बुनियादी सुविधा से वंचित है। स्थानीय निवासी राम सिंह दौसाद का कहना है, “करीब 40 साल से सड़क का इंतजार है, लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। वहीं जयंती देवी ने कहा कि 50 साल में कई सरकारें आईं, लेकिन गांव की सुध किसी ने नहीं ली।
ढीलम गांव की समस्या केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है। यहां के बच्चों को भी रोजाना लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलकर फाफा गांव तक शिक्षा के लिए जाना पड़ता है। बारिश, बर्फबारी और कठिन मौसम में यह यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है और वे लगातार उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक उन्हें ऐसी कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारना पड़ेगा और कब तक बुनियादी सुविधाएं उनके गांव तक पहुंचेंगी।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ों में विकास और वास्तविकता के बीच की खाई को उजागर करती है।
