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वाचस्पति रयाल@नरेन्द्रनगर।
रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे युवा उद्यमिता एवं नवाचार कौशल संस्कृति के जरिए कैसे स्वरोजगार अपना कर अपना भविष्य संवार सकते हैं, इसी उद्देश्य से यहां स्थित धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय में बुधवार को देवभूमि उद्यमिता योजना के अन्तर्गत एक दिवसीय उद्यमिता ओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो0 प्रणिता नन्द, कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा० संजय महर एवं भारतीय उद्यमिता संस्थान अहमदाबाद के प्रोजेक्टर आफिसर एवं मुख्य वक्ता दिग्विजय सजवाण के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
र्कायक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्रओं को उद्यमिता, स्टार्ट-अप, नवाचार, व्यावसायिक आइडियाज को धरातल पर उतार कर युवाओं को स्वरोजगार की तरफ प्रेरित कर जागरूक व आत्मनिर्भर बनाना है।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो० प्रणिता नंद ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा देवभूमि उद्यमिता के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता एवं स्व-रोजगार के प्रति प्रेरित करने के लिए अनेकों योजनाएं चलाई जा रही हैं।
कहा कि उत्तराखण्ड के हर्बल उत्पाद, बुरांश, माल्टा एवं औषधीय जड़ी-बूटियों के उत्पाद के माध्यम से युवा स्व-रोजगार अपना कर स्वावलंबी बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे उद्यमिता के जरिए,स्वावलंबी बनकर औरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के दिग्विजय सजवाण ने कहा कि उद्यमिता विकास प्रशिक्षण के माध्यम से छात्रों के आइडियाज एवं उत्तराखण्ड आधारित उत्पाद को मार्केट विस्तार एवं वित्तीय सहायता हेतु ई0डी0आई0 अहमदाबाद मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि सीड फंडिंग हेतु ब्राण्ड वैल्यू आवश्यक है, तभी उत्पाद एवं सेवाओं की मार्केटिंग सुदृढ़ तरीके से हो सकती है।
देवभूमि उद्यमिता केन्द्र के नोडल अधिकारी डॉ0 संजय महर ने सारगर्वित संबोधन में छात्र-छात्राओं को स्टार्ट-अप के लिए आइडियाज क्रिएशन के प्रति प्रेरित करते हुए, कहा कि किसी भी स्टार्ट-अप के लिए नवाचार, नवोन्मेष एवं उद्यमिता हेतु सृजनशीलता आवश्यक है, तभी चुनौतियों के बीच जोखिम प्रबन्धन के माध्यम से उद्यमिता में सफलता हासिल की जा सकती है और यह प्रयोग युवाओं के हुनर को तलाशने व उनमें उद्यमिता के प्रति जिज्ञासा पैदा करना है।
युवाओं में कुछ कर गुजरने की क्षमता व चेतना जागृत करने के मकसद से डॉक्टर संजय महर का यह वक्तव्य कि आइडियाज से आय तक, क्रिएटिव से कमाने तक, परफॉरमेंस से पहचान तक, उन्नयन से उद्योग तक, नवाचार से नवोन्मेश तक, युवा जोश से युवा उद्यमी बनने के सफर तक, रोजगार के रोडमैप से उद्यमिता के सफर की नई उड़ान तक, कौशल विकास से विकसित भारत की कल्पना तक, वोकल फॉर लोकल के सपने से वैश्विक बाजार तक और स्टार्ट-अप से स्टैंड-अप तक की दुनिया को जानते हुए सामर्थ्य से सशक्तीकरण एवं स्वावलम्बन तक की इस यात्रा के साक्षी बनें जैसे उद्बोधन का श्रवण कर युवाओं में नई चेतना का ऐसा संचार देखने को मिला, कि जैसे वे डॉक्टर संजय महर की उन वाक्यांशों में अपने भविष्य को तलाश रहे हों।
प्रशिक्षण के दौरान पर्यटन, होमस्टे, इकोटूरिज्म, औषधीय पुष्प, हर्बल शैम्पू, आई0टी0 में नवोन्मेष, उद्यम एवं वित्तीय प्रबन्धन के साथ ही उद्योग स्थापना की प्रक्रिया, उद्यमशीलता के गुण, सफल उद्यमी बनने के टिप्स, विपणन कौशल, उत्पाद गुणवत्ता, बाजार सर्वेक्षण, व्यवसाय विस्तार पर भी छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया गया।
साथ ही स्टार्टअप एवं कौशल विकास पर भी जोर दिया गया एवं छात्र-छात्राओं द्वारा अपने आइडिया के भी प्रस्तुतिकरण दिये गये।
इस मौके पर डॉ0 उमेश मैठाणी, डॉ0 राजपाल, डॉ0 सुशील, नताशा, सुधा रानी, डॉ0 सृचना सचदेवा, डॉ0 हिमांशु जोशी ,डॉ0 आराधना, डॉ0 विजय प्रकाश, जितेंन्द्र नौटियाल, शिशुपाल, अजय, छात्र संघ अध्यक्ष राहुल, आशु सहित विभिन्न संकायों के कई दर्जन छात्र-छात्रायें उपस्थित थे।
