- विकास के दावों की खुली पोल: सड़क न होने से ग्रामीणों ने बीमार महिला की कंधों पर ढोकर बचाई जान
थराली/देहरादून@रा. वि.। उत्तराखंड राज्य बने 25 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पहाड़ के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए ग्रामीणों को आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। ताजा मामला चमोली जिले के देवाल विकासखंड के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव ऐरठा से सामने आया है, जहां सड़क सुविधा के अभाव का दर्द एक बार फिर उजागर हुआ।
गांव की एक गंभीर रूप से बीमार महिला को ग्रामीणों को डंडी-कंडी में लिटाकर करीब पांच किलोमीटर दुर्गम और पगडंडी रास्ते से पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। यह घटना राज्य के विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को उजागर करती है।
जानकारी के अनुसार ऐरठा गांव निवासी 45 वर्षीय हिमांती देवी, पत्नी खड़क राम, लंबे समय से बीमार चल रही थीं। गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। गांव में सड़क और वाहन की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।
इसके बाद गांव के लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए हिमांती देवी को डंडी-कंडी में लिटाया और करीब पांच किलोमीटर लंबे दुर्गम रास्ते को पार करते हुए पैदल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल तक पहुंचाया। इस दौरान ग्रामीणों को खड़ी चढ़ाई, संकरे पगडंडी रास्तों और जोखिम भरे मार्ग से गुजरना पड़ा।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोबिन कुमार ने महिला का प्राथमिक उपचार किया। लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए कर्णप्रयाग के हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
बीमार महिला को अस्पताल तक पहुंचाने में पूरन राम, भवान राम, कुंवर राम, त्रिलोक राम, गणेशी देवी, कांति देवी, रमा देवी, विमला देवी समेत कई ग्रामीणों ने मदद की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक सड़क होती तो मरीज को इतनी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता।
पांच साल से अधर में लटकी सड़क
ग्राम प्रधान प्रेम देवी ने बताया कि अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव ऐरठा आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर 2021 को पदमला–कजेरू–ऐरठा तक करीब आठ किलोमीटर मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ था, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि राज्य गठन के बाद से सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती रही हैं, लेकिन ऐरठा जैसे गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सड़क न होने से ग्रामीणों को बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल तक पहुंचाने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों ने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं तो नेता गांव में विकास के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव फिर से उपेक्षा का शिकार हो जाता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द स्वीकृत सड़क का निर्माण शुरू कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बीमार व्यक्ति को इस तरह डंडी-कंडी में ढोकर अस्पताल न ले जाना पड़े।
